मरीज़ की इयादत की दुआ (1)
Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh.
फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा।
Al-Bukhari
मरीज़ और उसकी इयादत करने वाले के लिए, दर्द के लिए, और जनाज़ा, दफ़न व ताज़ियत की दुआएँ। हर पृष्ठ पर अरबी पाठ, अर्थ और स्रोत है।
Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh.
फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा।
Al-Bukhari
As'alullāha ‘l-`Aẓīma Rabba ‘l-`Arshil-`Aẓīmi an yashfiyak.
मैं अज़मत वाले अल्लाह, अज़ीम अर्श के रब से सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे। (अरबी में सात बार पढ़ें।)
At-Tirmidhi 2/210
जब कोई आदमी अपने बीमार मुसलमान भाई की इयादत को जाता है तो वह बैठने तक जन्नत के रास्ते पर चलता रहता है, और जब बैठ जाता है तो रहमत उसे ढक लेती है। अगर सुबह आए तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक उसके लिए दुआ करते हैं, और अगर शाम को आए तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते सुबह तक उसके लिए दुआ करते हैं।
Allāhumma’ghfir lī warḥamnī wa alḥiqnī bir-rafīqi ‘l-'A`alā.
ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे और मुझ पर रहम फ़रमा, और मुझे सबसे बुलंद साथियों (जन्नत में) के साथ मिला दे।
Al-Bukhari 7/10
As he was dying, the Prophet (ﷺ) dipped his hands in water and wiped his face saying: Lā ilāha illallāh inna li ‘lmawti la’sakarāt.
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, बेशक मौत की सख़्तियाँ हैं।
Al-Bukhari
Lā ilāha illallāh wallāhu Akbar, lā ilāha illallāhu waḥdah, lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lā ilāha illallāh lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd, lā ilāha illallāh wa lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh.
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, बादशाहत उसी की है और तारीफ़ उसी की। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।
At-Tirmidhi 3/152
Lā ilāha illallāh
जिसका आख़िरी कलाम (जिसका मतलब यह है) «अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं» हो, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
Abu Dawud 3/190
Allāhumma’ghfir li (name of the person) warfa` darajatahu fi ‘l-mahdiyyīn, wakhlufhu fī `aqibihi fi ‘l-ghābirīn, wagh’fir-lanā wa lahu yā Rabba ‘l-`ālamīn, wafsaḥ lahu fī qabrihi wa nawwir lahu fīh.
ऐ अल्लाह! [उस शख़्स का नाम] को बख़्श दे और हिदायत पाने वालों में उसका दर्जा बुलंद कर दे। उसे उन लोगों के रास्ते पर चला जो पहले गुज़र चुके, और हमें और उसे बख़्श दे, ऐ सारे जहानों के रब। उसकी क़ब्र उसके लिए कुशादा कर दे और उसमें उसके लिए नूर कर दे।
Muslim 2/634
Allāhumma’ghfir lahu warḥamh, wa `āfihi, wa`fu `anh, wa akrim nuzulah, wa wassi` mudkhalah, wagh’silhu bi ‘lmā'i wath-thalji walbarad, wa naqqihi mina ‘l-khaṭāyā kamā naqqaytath-thawba ‘l-abyaḍa minad-danas, wa abdilhu dāran khayran min dārih, wa ahlan khayran min ahlih, wa zawjan khayran min zawjih, wa adkhilhu ‘l-jannah, wa a`idhhu min `adhābi ‘l-qabri [wa `adhābin-nār].
ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा, उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे। उसकी इज़्ज़त के साथ मेहमान-नवाज़ी फ़रमा, और उसकी दाख़िले की जगह कुशादा कर दे, और उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे। उसे उसके गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से साफ़ किया जाता है। उसे उसके घर से बेहतर घर दे, उसके ख़ानदान से बेहतर ख़ानदान, और उसकी बीवी से बेहतर बीवी। उसे जन्नत में दाख़िल कर, और उसे क़ब्र के अज़ाब से [और जहन्नम के अज़ाब से] बचा।
Muslim 2/663
Allāhumma’ghfir liḥayyinā, wa mayyitinā, wa shāhidinā, wa ghā'ibinā, wa ṣaghīrinā wa kabīrinā, wa dhakarinā wa unthānā. Allāhumma man aḥyaytahu minnā fa aḥyihi `ala ‘l-Islām, wa man tawaffaytahu minnā fatawaffahu `alal-īmān, Allāhumma lā taḥrimnā ajrah wa lā tuḍillanā ba`dah.
ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को बख़्श दे, जो हमारे साथ मौजूद हैं और जो ग़ैर-हाज़िर हैं, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, हमारे मर्दों और हमारी औरतों को। ऐ अल्लाह! हममें से जिसे तू ज़िंदा रखे उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख, और हममें से जिसे तू वफ़ात दे उसे ईमान पर वफ़ात दे। ऐ अल्लाह! हमें उनके अज्र से महरूम न कर और उनके बाद हमें गुमराह न कर।
Ibn Majah 1/480
Allāhumma inna [name the person] fī dhimmatik, wa ḥabli jiwārik, faqihi min fitnati ‘l-qabri wa `adhābin-nār, wa anta ahlu ‘l-wafā'i wa ‘l-ḥaqq. Faghfir lahu warḥamh innaka anta ‘l-Ghafūrur-Raḥīm.
ऐ अल्लाह! बेशक [उस शख़्स का नाम] तेरी पनाह में है, और तेरी अमान की रस्सी में है, तो उसे क़ब्र के फ़ितने और आग के अज़ाब से बचा ले। तू वादे पूरे करता है और हक़ देता है, तो उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा। बेशक तू बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम वाला है।
Ibn Majah, Abu Dawud 3/211
Allāhumma `abduka wabnu 'amatik iḥtāja ilā raḥmatik, wa anta ghaniyyun `an `adhābih, in kāna muḥsinan fazid fī ḥasanātih, wa in kāna musī'an fatajāwaz `anh.
ऐ अल्लाह! तेरा बंदा और तेरी बांदी का बेटा तेरी रहमत का मोहताज है, और तुझे उसे अज़ाब देने की कोई हाजत नहीं। अगर वह नेक था तो उसकी नेकियाँ बढ़ा दे और अगर वह गुनाहगार था तो उसे माफ़ कर दे।
Al-Hakim 1/359
Allāhumma a`idh’hu min `adhābi ‘l-qabr [or say:] Allāhumma ‘j`alhu faraṭan wa dhukhran liwālidayh, wa shafī`an mujāban. Allāhumma thaqqil bihi mawāzīnahumā wa a`ẓim bihi ujūrahumā, wa alḥiqhu biṣāliḥi ‘l-mu'minīn, waj`alhu fī kafālati Ibrāhīm, wa qihi biraḥmatika `adhāba ‘l-jaḥīm, wa abdilhu dāran khayran min dārih, wa ahlan khayran min ahlih, Allāhumma’ghfir li aslāfinā wa afrāṭinā wa man sabaqanā bil īmān.
ऐ अल्लाह! उसे क़ब्र के अज़ाब से बचा। [यह भी कहना अच्छा है:] ऐ अल्लाह! उसे उसके माता-पिता के लिए पेशरौ, आगे भेजा हुआ और ज़ख़ीरा, और क़ुबूल होने वाला सिफ़ारिशी बना दे। ऐ अल्लाह! उसे उनके (नेकियों के) पलड़े में भारी कर दे और उनका अज्र बढ़ा दे। उसे नेक मोमिनों के साथ मिला दे। उसे इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की किफ़ालत में दे। अपनी रहमत से उसे जहन्नम के अज़ाब से बचा। उसे उसके घर से बेहतर घर और उसके ख़ानदान से बेहतर ख़ानदान दे। ऐ अल्लाह! हमारे गुज़र जाने वालों को, हमारे फ़ौत हुए बच्चों को, और ईमान में हमसे पहले जाने वालों को बख़्श दे।
Allāhumma’j`alhu lanā faraṭan, wa salafan, wa ajra.
ऐ अल्लाह! उसे हमारे लिए पेशरौ, आगे भेजा हुआ और अज्र का ज़रिया बना दे।
Inna lillāhi mā akhadh, wa lahu mā a`tā, wa kullu shay'in `indahu bi ajalin musammā . . . faltaṣbir wa ‘l-taḥtasib . [Also good to say:] A`ẓamallāhu ajrak, wa 'aḥsana `azā'ak, wa ghafara limayyitik.
बेशक अल्लाह ही का है जो वह ले ले, और उसी का है जो वह दे, और हर चीज़ के लिए उसके यहाँ एक मुक़र्रर वक़्त है... तो सब्र करो और अज्र पाओ। अल्लाह तुम्हारा अज्र बढ़ाए, तुम्हारे ग़म का अच्छा बदला दे और तुम्हारे फ़ौत हुए को बख़्श दे।
Al-Bukhari 2/80
Bismillāh wa `alā sunnati Rasūlillāh.
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल ﷺ की सुन्नत के मुताबिक़।
Abu Dawud 3/314
Allāhumma’ghfir lah Allāhumma thabbit’h.
ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे। ऐ अल्लाह! उसे साबित-क़दमी दे।
Abu Dawud 3/315
Assalāmu `alaykum ahlad-diyāri minal-mu'minīna wa ‘l-muslimīn, wa innā in shā' Allāhu bikum lāḥiqūn nas'alullāha lanā wa lakumul-`āfiyah.
ऐ इस बस्ती के रहने वालो! आप पर सलाम हो, मोमिनों और मुसलमानों में से, और हम, अल्लाह ने चाहा तो, आपसे मिलने वाले हैं। [अल्लाह हममें से पहले जाने वालों पर भी रहम करे और बाद में जाने वालों पर भी] मैं अल्लाह से हमारे लिए और आपके लिए आफ़ियत माँगता हूँ।
Muslim 2/671
Put your hand on the place where you feel pain and say: Bismillāh (three times). Then say seven times: A`ūdhu billāhi wa qudratihi min sharri mā ajidu wa uḥādhir.
अपना हाथ उस जगह रखें जहाँ आपको दर्द हो और कहें: अल्लाह के नाम से (तीन बार)। फिर सात बार कहें: मैं अल्लाह की और उसकी क़ुदरत की पनाह माँगता हूँ उस बुराई से जो मैं पाता हूँ और जिससे मैं डरता हूँ।
Muslim 4/1728