जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए (3 में से 3)
जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।
“जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/152, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Lā ilāha illallāh wallāhu Akbar, lā ilāha illallāhu waḥdah, lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lā ilāha illallāh lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd, lā ilāha illallāh wa lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh.
हिंदी अर्थ
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, बादशाहत उसी की है और तारीफ़ उसी की। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/152।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/152, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, बादशाहत उसी की है और तारीफ़ उसी की। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।
“जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh wallāhu Akbar, lā ilāha illallāhu waḥdah, lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lā ilāha illallāh lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd, lā ilāha illallāh wa lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh.
“जब मरीज़ ज़िंदगी से मायूस हो जाए” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 3/152। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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