मरीज़ की इयादत की दुआ (2 में से 2)

मरीज़ की इयादत की दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।

“मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “As'alullāha ‘l-`Aẓīma Rabba ‘l-`Arshil-`Aẓīmi an yashfiyak”, और इसका अर्थ है: “मैं अज़मत वाले अल्लाह, अज़ीम अर्श के रब से सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे”। स्रोत: At-Tirmidhi 2/210, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

मरीज़ की इयादत की दुआ: अरबी पाठ

أَسْأَلُ اللهَ العَظيم، رَبَّ العَرْشِ العَظيم أَنْ يَشْفيك.(سبع مرات)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

As'alullāha ‘l-`Aẓīma Rabba ‘l-`Arshil-`Aẓīmi an yashfiyak.

हिंदी अर्थ

मैं अज़मत वाले अल्लाह, अज़ीम अर्श के रब से सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे। (अरबी में सात बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मरीज़ की इयादत की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 2/210।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “As'alullāha ‘l-`Aẓīma Rabba ‘l-`Arshil-`Aẓīmi an yashfiyak”, और इसका अर्थ है: “मैं अज़मत वाले अल्लाह, अज़ीम अर्श के रब से सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे”। स्रोत: At-Tirmidhi 2/210, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं अज़मत वाले अल्लाह, अज़ीम अर्श के रब से सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे। (अरबी में सात बार पढ़ें।).

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): As'alullāha ‘l-`Aẓīma Rabba ‘l-`Arshil-`Aẓīmi an yashfiyak.

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 2/210। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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