मरीज़ की इयादत की दुआ (2 में से 1)

मरीज़ की इयादत की दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।

“मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh”, और इसका अर्थ है: “फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

मरीज़ की इयादत की दुआ: अरबी पाठ

لا بأْسَ طَهورٌ إِنْ شاءَ الله

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh.

हिंदी अर्थ

फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मरीज़ की इयादत की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “मरीज़ की इयादत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh”, और इसका अर्थ है: “फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

फ़िक्र न करो, इंशाअल्लाह यह (तुम्हारे लिए) पाकी का ज़रिया होगा।

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ba'sa ṭahūrun in shā Allāh.

“मरीज़ की इयादत की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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