गुनाह हो जाने पर की दुआ
अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से बख़्शिश माँगे, मगर यह कि अल्लाह उसे बख़्श देता है।
Abu Dawud 2/86
इस्तिग़फ़ार और तस्बीह, तहमीद, तहलील व तकबीर के अज़कार, गुनाह की दुआ और मजलिस के कफ़्फ़ारे की दुआ के साथ। हर पृष्ठ अपना स्रोत बताता है।
अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से बख़्शिश माँगे, मगर यह कि अल्लाह उसे बख़्श देता है।
Abu Dawud 2/86
Ibn Umar (ra) said: Allah's Messenger (ﷺ) used to repeat in a single sitting: Rabbigh’fir lī wa tub `alayy innaka antat-Tawwābu ‘l-Ghafūr.
इब्ने-उमर (र.अ.) ने कहा: अल्लाह के रसूल ﷺ एक ही मजलिस में यह दोहराते थे: ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे, और मेरी तौबा क़ुबूल फ़रमा, बेशक तू बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला, बहुत बख़्शने वाला है।
Ibn Majah 2/321
Subḥānaka Allāhumma wa-bi-ḥamdik, ashhadu an lā ilāha illā ant, astaghfiruka wa-atūbu ilayk.
ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं तुझसे बख़्शिश माँगता हूँ और तेरी ओर तौबा करता हूँ।
At-Tirmidhi 3/153
Walaka
और आपको भी।
Ahmad 5/82
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “अल्लाह की क़सम! मैं एक दिन में सत्तर से ज़्यादा बार अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ।”
Al-Bukhari
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ लोगो! अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि मैं एक दिन में सौ बार उसकी ओर तौबा करता हूँ।”
Muslim 4/2076
Allah's Messenger (ﷺ) said: Whoever says: Astaghfirullāha ‘l-'Aẓīm alladhi lā ilāha illā huwa ‘l-ḥayyul-Qayyūm wa atūbu ilayh.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स यह कहे: मैं अज़मत वाले अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, जो हमेशा ज़िंदा और क़ायम रखने वाला है, और मैं उसकी ओर तौबा करता हूँ, अल्लाह उसे बख़्श देगा चाहे वह जंग की सफ़ों से भागा हो।
Abu Dawud 2/85
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “रब अपने बंदे के सबसे ज़्यादा क़रीब रात के आख़िरी हिस्से में होता है। तो अगर तुम उन लोगों में शामिल हो सको जो इस घड़ी अल्लाह को याद करते हैं तो उनमें शामिल हो जाओ।”
At-Tirmidhi, An-Nasa'i 1/279
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “बंदा अपने रब के सबसे ज़्यादा क़रीब सज्दे की हालत में होता है, इसलिए इसमें ख़ूब दुआ किया करो।”
Muslim 1/350
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “मेरे दिल पर यह भारी है कि मैं दिन में सौ बार अल्लाह से बख़्शिश न माँगूँ।”
Muslim 4/2075
Allah's Messenger (ﷺ) said: Whoever says: Subḥānallāhi wa biḥamdihi. one hundred times a day, will have his sins forgiven even if they are like the foam of the sea.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स दिन में सौ बार यह कहे: मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ, उसके गुनाह बख़्श दिए जाते हैं चाहे वे समुंदर की झाग के बराबर हों।
Al-Bukhari 7/168
Allah's Messenger (ﷺ) said: Whoever says: Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd wa huwa `alā kulli shay'in Qadīr. ten times, will have the reward for freeing four slaves from the Children of Isma'il.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स दस बार यह कहे: अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है, उसे औलाद-ए-इस्माईल में से चार ग़ुलाम आज़ाद करने का अज्र मिलेगा।
Al-Bukhari 7/67
Allah's Messenger (ﷺ) said: Two words are light on the tongue, weigh heavily in the balance, and are loved by the Most Merciful One: Subḥānallāhi wa biḥamdih, Subḥānallāhi ‘l-`Aẓīm.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: दो कलिमे ज़बान पर हल्के, तराज़ू में भारी और रहमान को महबूब हैं: मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ, अज़मत वाला अल्लाह पाक है।
Al-Bukhari 7/168
Allah's Messenger (ﷺ) said: For me to say: Subḥānallāh, walḥamdu lillāh, wa lā ilāha illallāh, wallāhu 'Akbar is dearer to me than all that the sun rises upon (i.e. the whole world).
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: मेरा यह कहना: अल्लाह पाक है, और तारीफ़ अल्लाह के लिए है, और अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है, मुझे हर उस चीज़ से ज़्यादा महबूब है जिस पर सूरज निकलता है (यानी पूरी दुनिया)।
Muslim 4/2072
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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “क्या तुममें से कोई एक दिन में हज़ार नेकियाँ कमाने से आजिज़ है?” उनकी मजलिस में से किसी ने पूछा: “हममें से कोई हज़ार नेकियाँ कैसे कमा सकता है?” आपने फ़रमाया: “सौ बार अल्लाह की तस्बीह करो, तुम्हारे लिए हज़ार नेकियाँ लिख दी जाएँगी या हज़ार गुनाह मिटा दिए जाएँगे।”
Muslim 4/2073
Whoever says: Subḥānallāhi ‘l-'Aẓīmi wa biḥamdih will have a date palm planted for him in Paradise.
जो शख़्स कहे: अज़मत वाला अल्लाह पाक है और उसी की तारीफ़ है, उसके लिए जन्नत में खजूर का एक पेड़ लगा दिया जाता है।
At-Tirmidhi 5/511
Allah's Messenger (ﷺ) said: "O Abdullah bin Qais, should I not point you to one of the treasures of Paradise?" I said, "Yes, O Messenger of Allah." So he told me to say: Lā ḥawla wa lā quwwata 'illā billāh.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ अब्दुल्लाह बिन क़ैस! क्या मैं तुम्हें जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना न बताऊँ?” मैंने कहा: “जी हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल।” तो आपने मुझे यह कहने को फ़रमाया: गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।
Muslim 4/2076
Allah's Messenger (ﷺ) said: The most beloved words to Allah are four: Subḥānallāh Walḥamdu lillāh. Wa lā ilāha illallāh Wallāhu Akbar.
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: अल्लाह को सबसे महबूब कलिमात चार हैं: अल्लाह पाक है, और तारीफ़ अल्लाह के लिए है, और अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है।
Muslim 3/1685
A desert Arab came to Allah's Messenger (ﷺ) and said, "Teach me a word that I can say. " The Prophet (ﷺ) told him to say: Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, Allāhu Akbaru kabīra, walḥamdu lillāhi kathīra, Subḥānallāhi Rabbil-`ālamīn, Lā ḥawla wa lā quwwata illā billāhi ‘l-`Azīzil-Hakīm. He said, "That is for my Lord, but what about me?" The Prophet (ﷺ) told him to say: Allāhummaghfir lī, warḥamnī, waḥdinī warzuqnī.
एक देहाती अल्लाह के रसूल ﷺ के पास आया और कहा, “मुझे कोई ऐसा कलिमा सिखाइए जो मैं कहा करूँ।” नबी ﷺ ने उसे यह कहने को फ़रमाया: अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं, अल्लाह बहुत बड़ा है, सबसे बड़ा, और अल्लाह के लिए बहुत-बहुत तारीफ़ है, अल्लाह पाक है, सारे जहानों का रब। गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है जो ग़ालिब और हिकमत वाला है। उसने कहा: “यह तो मेरे रब के लिए है, मेरे लिए क्या है?” नबी ﷺ ने उसे यह कहने को फ़रमाया: ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे और मुझे रिज़्क़ दे।
Muslim 4/2072
Whenever anyone accepted Islam, the Prophet (ﷺ) used to teach him how to pray then he would instruct him to invoke Allah with the following words: Allāhummaghfir lī, warḥamnī, waḥdinī, wa `āfinī warzuqnī.
जब कोई इस्लाम क़ुबूल करता तो नबी ﷺ उसे नमाज़ पढ़ना सिखाते, फिर उसे इन कलिमात से अल्लाह से दुआ करने की तलक़ीन फ़रमाते: ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे, मुझे आफ़ियत दे और मुझे रिज़्क़ दे।
Muslim 4/2073
The most excellent invocation is: Alḥamdulillāh and the most excellent words of remembrance are: Lā ilāha illallāh.
सबसे अफ़ज़ल दुआ यह है: तारीफ़ अल्लाह के लिए है। और सबसे अफ़ज़ल ज़िक्र यह है: अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।
At-Tirmidhi 5/462
The good deeds which endure are: Subḥānallāh. Walḥamdu lillāh. Wa lā ilāha illallāh Wallāhu Akbar Wa lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh.
बाक़ी रहने वाली नेकियाँ ये हैं: अल्लाह पाक है, और तारीफ़ अल्लाह के लिए है, और अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है, और गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।
Ahmad
अब्दुल्लाह बिन अम्र (र.अ.) ने कहा: “मैंने नबी ﷺ को अपने रब की तस्बीह अपने दाएँ हाथ पर गिनते देखा।”
Abu Dawud with a different wording 2/81