गुनाह हो जाने पर की दुआ
गुनाह हो जाने पर की दुआ। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़…”। स्रोत: Abu Dawud 2/86, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
गुनाह हो जाने पर की दुआ: अरबी पाठ
हिंदी अर्थ
अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से बख़्शिश माँगे, मगर यह कि अल्लाह उसे बख़्श देता है।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “गुनाह हो जाने पर की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 2/86।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़…”। स्रोत: Abu Dawud 2/86, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह का कोई बंदा ऐसा नहीं जो गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह पाकी हासिल करे और खड़े होकर दो रकअत नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से बख़्शिश माँगे, मगर यह कि अल्लाह उसे बख़्श देता है।
“गुनाह हो जाने पर की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 2/86। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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