मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ
मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Subḥānaka Allāhumma wa-bi-ḥamdik, ashhadu an lā ilāha illā ant…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/153, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Subḥānaka Allāhumma wa-bi-ḥamdik, ashhadu an lā ilāha illā ant, astaghfiruka wa-atūbu ilayk.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं तुझसे बख़्शिश माँगता हूँ और तेरी ओर तौबा करता हूँ।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/153।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Subḥānaka Allāhumma wa-bi-ḥamdik, ashhadu an lā ilāha illā ant…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/153, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं तुझसे बख़्शिश माँगता हूँ और तेरी ओर तौबा करता हूँ।
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Subḥānaka Allāhumma wa-bi-ḥamdik, ashhadu an lā ilāha illā ant, astaghfiruka wa-atūbu ilayk.
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 3/153। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
“मजलिस के अंत में गुनाहों के कफ़्फ़ारे की दुआ” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?
स्रोत के अनुसार 1 बार।
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