मजलिस में बैठने की दुआ

मजलिस में बैठने की दुआ। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।

“मजलिस में बैठने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मजलिस में बैठने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Rabbigh’fir lī”, और इसका अर्थ है: “ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे”। स्रोत: Ibn Majah 2/321, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

मजलिस में बैठने की दुआ: अरबी पाठ

عن ابن عمر قال: كان يعد لرسول الله صلى الله عليه وسلم في المجلس الواحد مائة مرة من قبل أن يقوم«رب اغفر ليوتب عليإنك أنت التواب الغفور»

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Ibn Umar (ra) said: Allah's Messenger (ﷺ) used to repeat in a single sitting: Rabbigh’fir lī wa tub `alayy innaka antat-Tawwābu ‘l-Ghafūr.

हिंदी अर्थ

इब्ने-उमर (र.अ.) ने कहा: अल्लाह के रसूल ﷺ एक ही मजलिस में यह दोहराते थे: ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे, और मेरी तौबा क़ुबूल फ़रमा, बेशक तू बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला, बहुत बख़्शने वाला है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मजलिस में बैठने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ibn Majah 2/321।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“मजलिस में बैठने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मजलिस में बैठने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Rabbigh’fir lī”, और इसका अर्थ है: “ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे”। स्रोत: Ibn Majah 2/321, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

“मजलिस में बैठने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे, और मेरी तौबा क़ुबूल फ़रमा, बेशक तू बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला, बहुत बख़्शने वाला है।

“मजलिस में बैठने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Rabbigh’fir lī wa tub `alayy innaka antat-Tawwābu ‘l-Ghafūr.

“मजलिस में बैठने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Ibn Majah 2/321। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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