तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत (12 में से 2)

तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।

“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Al-Bukhari 7/67, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: مَنْ قَالَ (لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ، وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ) عَشْرَ مِرَارٍ، كَانَ كَمَنْ أَعْتَقَ أَرْبَعَةَ أَنْفُسٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allah's Messenger (ﷺ) said: Whoever says: Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd wa huwa `alā kulli shay'in Qadīr. ten times, will have the reward for freeing four slaves from the Children of Isma'il.

हिंदी अर्थ

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स दस बार यह कहे: अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है, उसे औलाद-ए-इस्माईल में से चार ग़ुलाम आज़ाद करने का अज्र मिलेगा।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/67।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Al-Bukhari 7/67, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है, उसे औलाद-ए-इस्माईल में से चार ग़ुलाम आज़ाद करने का अज्र मिलेगा।

“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd wa huwa `alā kulli shay'in Qadīr. ten times, will have the reward for freeing four slaves from the Children of Isma'il.

“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 7/67। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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