तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत (12 में से 1)
तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Subḥānallāhi wa biḥamdihi”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/168, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allah's Messenger (ﷺ) said: Whoever says: Subḥānallāhi wa biḥamdihi. one hundred times a day, will have his sins forgiven even if they are like the foam of the sea.
हिंदी अर्थ
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स दिन में सौ बार यह कहे: मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ, उसके गुनाह बख़्श दिए जाते हैं चाहे वे समुंदर की झाग के बराबर हों।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/168।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Subḥānallāhi wa biḥamdihi”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/168, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?
मैं अल्लाह को पाक कहता हूँ और उसकी तारीफ़ करता हूँ, उसके गुनाह बख़्श दिए जाते हैं चाहे वे समुंदर की झाग के बराबर हों।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Subḥānallāhi wa biḥamdihi. one hundred times a day, will have his sins forgiven even if they are like the foam of the sea.
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari 7/168। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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