तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत (12 में से 9)
तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “A desert Arab came to Allah's Messenger (ﷺ) and…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Muslim 4/2072, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
A desert Arab came to Allah's Messenger (ﷺ) and said, "Teach me a word that I can say. " The Prophet (ﷺ) told him to say: Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, Allāhu Akbaru kabīra, walḥamdu lillāhi kathīra, Subḥānallāhi Rabbil-`ālamīn, Lā ḥawla wa lā quwwata illā billāhi ‘l-`Azīzil-Hakīm. He said, "That is for my Lord, but what about me?" The Prophet (ﷺ) told him to say: Allāhummaghfir lī, warḥamnī, waḥdinī warzuqnī.
हिंदी अर्थ
एक देहाती अल्लाह के रसूल ﷺ के पास आया और कहा, “मुझे कोई ऐसा कलिमा सिखाइए जो मैं कहा करूँ।” नबी ﷺ ने उसे यह कहने को फ़रमाया: अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं, अल्लाह बहुत बड़ा है, सबसे बड़ा, और अल्लाह के लिए बहुत-बहुत तारीफ़ है, अल्लाह पाक है, सारे जहानों का रब। गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है जो ग़ालिब और हिकमत वाला है। उसने कहा: “यह तो मेरे रब के लिए है, मेरे लिए क्या है?” नबी ﷺ ने उसे यह कहने को फ़रमाया: ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे और मुझे रिज़्क़ दे।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2072।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 12 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “A desert Arab came to Allah's Messenger (ﷺ) and…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Muslim 4/2072, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं, अल्लाह बहुत बड़ा है, सबसे बड़ा, और अल्लाह के लिए बहुत-बहुत तारीफ़ है, अल्लाह पाक है, सारे जहानों का रब। गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है जो ग़ालिब और हिकमत वाला है। ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे और मुझे रिज़्क़ दे।
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): A desert Arab came to Allah's Messenger (ﷺ) and said, "Teach me a word Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, Allāhu Akbaru kabīra, walḥamdu lillāhi kathīra, Subḥānallāhi Rabbil-`ālamīn, Lā ḥawla wa lā quwwata illā billāhi ‘l-`Azīzil-Hakīm. He said, "That is for my Lord, but what about me?" The Prophet (ﷺ) told Allāhummaghfir lī, warḥamnī, waḥdinī warzuqnī.
“तस्बीह, तहमीद, तहलील और तकबीर की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?
Muslim 4/2072। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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