घर और रोज़मर्रा की दुआएँ

लिबास पहनने, बैतुल-खला जाने, वुज़ू करने और घर में दाख़िल होने या निकलने की छोटी दुआएँ। लोग सबसे पहले यही दुआएँ याद करते हैं।

14 दुआएँ

कपड़ा पहनने की दुआ

الحمدُ للهِ الّذي كَساني هذا (الثّوب)وَرَزَقَنيه مِنْ غَيْرِ حَولٍ مِنّي وَلا قوّة

Alḥamdu lillāhil-ladhī kasānī hādhā (aththawba) wa razaqanīhi min ghayri hawlim-minnī wa lā quwwah.

सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे यह (लिबास) पहनाया और मुझे अता किया, जबकि मैं ख़ुद बेबस और असमर्थ था।

Al-Bukhari, Muslim, Abu Dawud, Ibn Majah

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नया कपड़ा पहनने की दुआ

اللّهُمَّ لَكَ الحَمْدُ أنْتَ كَسَوْتَنيهِ،أََسْأََلُكَ مِنْ خَيرِهِ وَخَيْرِ مَا صُنِعَ لَه،وَأَعوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهِ وَشَرِّ ما صُنِعَ لَهُ

Allāhumma lakal-ḥamdu 'anta kasawtanīhi, 'as'aluka min khayrihi wa khayri mā ṣuni`a lahu, wa 'a`oothu bika min sharrihi wa sharri mā ṣuni`a lahu.

ऐ अल्लाह! तेरे ही लिए हर प्रशंसा है। तूने मुझे यह पहनाया। मैं तुझसे इसकी भलाई और उस मक़सद की भलाई माँगता हूँ जिसके लिए यह बना, और तेरी पनाह माँगता हूँ इसकी बुराई से और उस मक़सद की बुराई से जिसके लिए यह बना।

Abu Dawud and At-Tirmidhi

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नया कपड़ा पहनने वाले के लिए दुआ (2)

اِلبَس جَديداًوَعِشْ حَميداًوَمُتْ شهيداً

Ilbas jadīdan, wa `ish ḥamīdan, wa mut shahīdan.

नया लिबास पहनो, प्रशंसनीय ज़िंदगी जियो और शहादत की मौत पाओ।

Ibn Majah 2/1178

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बैतुल-खला में जाने से पहले की दुआ

(بِسْمِ الله)اللّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَ مِنَ الْخُبْثِ وَالْخَبائِث

[Bismillāhi] Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika minal-khubthi walkhabā'ith.

[अल्लाह के नाम से।] ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ बुराई और बुराई वालों से (या नर और मादा जिन्नों की बुराई से)।

Al-Bukhari 1/45

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वुज़ू पूरा करने के बाद की दुआ (1)

أَشْهَدُ أَنْ لا إِلَهَ إِلاّ اللهُوَحْدَهُ لا شَريكَ لَهُوَأَشْهَدُأَنَّ مُحَمّداً عَبْدُهُ وَرَسولُه

'Ash-hadu 'an lā 'ilāha 'illallāhu waḥdahu lā sharīka lahu wa 'ash-hadu 'anna Muḥammadan `abduhu wa Rasūluhu.

मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं; और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और उसके रसूल हैं।

Muslim 1/209

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वुज़ू पूरा करने के बाद की दुआ (2)

اللّهُمَّ اجْعَلني مِنَ التَّوّابينَوَاجْعَلْني مِنَ المتَطَهّرين.

Allāhummaj`alnī minat-tawwābīna waj`alnī minal-mutaṭahhirīn.

ऐ अल्लाह! मुझे उनमें शामिल कर जो तौबा करते हैं और मुझे उनमें शामिल कर जो पाक रहते हैं।

At-Tirmidhi 1/78

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वुज़ू पूरा करने के बाद की दुआ (3)

سُبْحانَكَ اللّهُمَّ وَبِحَمدِكأَشْهَدُ أَنْ لا إِلهَ إِلاّ أَنْتَأَسْتَغْفِرُكَ وَأَتوبُ إِلَيْك

Subḥānaka Allāhumma wa biḥamdika, 'ash-hadu 'an lā 'ilāha 'illā 'Anta, 'astaghfiruka wa 'atūbu 'ilayk.

ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है; मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं तुझसे बख़्शिश माँगता हूँ और तौबा करके तेरी ओर रुजू करता हूँ।

An-Nasa'i

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घर से निकलने की दुआ (1)

بِسْمِ اللهِ، تَوَكَّلْتُ عَلى اللهِوَلا حَوْلَ وَلا قُوَّةَ إِلاّ بِالله

Bismillāhi, tawakkaltu `alallāhi, wa lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh.

अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है।

Abu Dawud 4/325

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घर से निकलने की दुआ (2)

اللّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَأَنْ أَضِلَّ أَوْ أُضَل،أَوْ أَزِلَّ أَوْ أُزَل،أَوْ أَظْلِمَ أَوْ أَُظْلَم،أَوْ أَجْهَلَ أَوْ يُجْهَلَ عَلَيّ

Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika 'an 'aḍilla, 'aw 'uḍalla, 'aw 'azilla, 'aw 'uzalla, 'aw 'aẓlima, 'aw 'uẓlama, 'aw 'ajhala 'aw yujhala `alayya.

ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इससे कि मैं किसी को गुमराह करूँ या कोई मुझे गुमराह करे, मैं किसी को फिसलाऊँ या मुझे फिसलाया जाए, मैं किसी पर ज़ुल्म करूँ या मुझ पर ज़ुल्म किया जाए, और मैं नादानी करूँ या किसी की नादानी का शिकार बनूँ।

At-Tirmidhi 3/152

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घर में दाख़िल होने की दुआ

بِسْمِ اللهِ وَلَجْنا،وَبِسْمِ اللهِ خَرَجْنا،وَعَلى رَبِّنا تَوَكّلْن(ثم ليسلم على أهله.)

Bismillāhi walajnā, wa bismillāhi kharajnā, wa `ala Rabbinā tawakkalnā

अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं, अल्लाह के नाम से हम निकलते हैं, और अपने रब ही पर हम भरोसा करते हैं [फिर मौजूद लोगों को «अस्सलामु अलैकुम» कहें]।

Abu Dawud 4/325

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मौक़े के अनुसार दुआएँ