घर में दाख़िल होने की दुआ

घर में दाख़िल होने की दुआ। लिबास, बैतुल-खला, वुज़ू, घर आना-जाना।

“घर में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“घर में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Bismillāhi walajnā”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं”। स्रोत: Abu Dawud 4/325, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

घर में दाख़िल होने की दुआ: अरबी पाठ

بِسْمِ اللهِ وَلَجْنا،وَبِسْمِ اللهِ خَرَجْنا،وَعَلى رَبِّنا تَوَكّلْن(ثم ليسلم على أهله.)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Bismillāhi walajnā, wa bismillāhi kharajnā, wa `ala Rabbinā tawakkalnā

हिंदी अर्थ

अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं, अल्लाह के नाम से हम निकलते हैं, और अपने रब ही पर हम भरोसा करते हैं [फिर मौजूद लोगों को «अस्सलामु अलैकुम» कहें]।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “घर में दाख़िल होने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/325।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“घर में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“घर में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Bismillāhi walajnā”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं”। स्रोत: Abu Dawud 4/325, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“घर में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह के नाम से हम दाख़िल होते हैं, अल्लाह के नाम से हम निकलते हैं, और अपने रब ही पर हम भरोसा करते हैं [फिर मौजूद लोगों को «अस्सलामु अलैकुम» कहें]।

“घर में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Bismillāhi walajnā, wa bismillāhi kharajnā, wa `ala Rabbinā tawakkalnā

“घर में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/325। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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