इस्तिग़फ़ार और तौबा (6 में से 2)

इस्तिग़फ़ार और तौबा। इस्तिग़फ़ार, तस्बीह, तहमीद।

“इस्तिग़फ़ार और तौबा” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “इस्तिग़फ़ार और तौबा” के अंतर्गत आने वाली 6 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ लोगो! अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि मैं एक दिन में सौ बार उसकी ओर…”। स्रोत: Muslim 4/2076, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

इस्तिग़फ़ार और तौबा: अरबी पाठ

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: (يَا أَيُّهَا النَّاسُ تُوبُوا إِلَى اللَّهِ فَإِنِّي أَتُوبُ فِي الْيَوْمِ إِلَيْهِ مِائَةَ مَرَّةٍ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

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हिंदी अर्थ

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ लोगो! अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि मैं एक दिन में सौ बार उसकी ओर तौबा करता हूँ।”

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “इस्तिग़फ़ार और तौबा” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2076।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“इस्तिग़फ़ार और तौबा” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “इस्तिग़फ़ार और तौबा” के अंतर्गत आने वाली 6 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ लोगो! अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि मैं एक दिन में सौ बार उसकी ओर…”। स्रोत: Muslim 4/2076, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“इस्तिग़फ़ार और तौबा” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “ऐ लोगो! अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि मैं एक दिन में सौ बार उसकी ओर तौबा करता हूँ।

“इस्तिग़फ़ार और तौबा” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): --

“इस्तिग़फ़ार और तौबा” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 4/2076। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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