मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ
मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Bismillāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से”। स्रोत: Abu Dawud 3/314, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।
मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Bismillāh wa `alā sunnati Rasūlillāh.
हिंदी अर्थ
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल ﷺ की सुन्नत के मुताबिक़।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 3/314।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Bismillāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से”। स्रोत: Abu Dawud 3/314, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल ﷺ की सुन्नत के मुताबिक़।
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Bismillāh wa `alā sunnati Rasūlillāh.
“मय्यत को क़ब्र में उतारते समय की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 3/314। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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