जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ (4 में से 1)

जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir lahu warḥamh”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा”। स्रोत: Muslim 2/663, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ: अरबी पाठ

اللهُمِّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْه،وَعافِهِ وَاعْفُ عَنْه،وَأَكْرِمْ نُزُلَه،وَوَسِّعْ مُدْخَلَه،وَاغْسِلْهُ بِالْماءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدْ،وَنَقِّهِ مِنَ الْخطاياكَما نَقّيْتَ الثَّوْبَ الأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسْ،وَأَبْدِلْهُ داراً خَيْراً مِنْ دارِه،وَأَهْلاً خَيْراً مِنْ أَهْلِه،وَزَوْجَاً خَيْراً مِنْ زَوْجِه،وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّة،وَأَعِذْهُ مِنْ عَذابِ القَبْر [وَعَذابِ النّار]

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma’ghfir lahu warḥamh, wa `āfihi, wa`fu `anh, wa akrim nuzulah, wa wassi` mudkhalah, wagh’silhu bi ‘lmā'i wath-thalji walbarad, wa naqqihi mina ‘l-khaṭāyā kamā naqqaytath-thawba ‘l-abyaḍa minad-danas, wa abdilhu dāran khayran min dārih, wa ahlan khayran min ahlih, wa zawjan khayran min zawjih, wa adkhilhu ‘l-jannah, wa a`idhhu min `adhābi ‘l-qabri [wa `adhābin-nār].

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा, उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे। उसकी इज़्ज़त के साथ मेहमान-नवाज़ी फ़रमा, और उसकी दाख़िले की जगह कुशादा कर दे, और उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे। उसे उसके गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से साफ़ किया जाता है। उसे उसके घर से बेहतर घर दे, उसके ख़ानदान से बेहतर ख़ानदान, और उसकी बीवी से बेहतर बीवी। उसे जन्नत में दाख़िल कर, और उसे क़ब्र के अज़ाब से [और जहन्नम के अज़ाब से] बचा।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/663।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir lahu warḥamh”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा”। स्रोत: Muslim 2/663, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा, उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे। उसकी इज़्ज़त के साथ मेहमान-नवाज़ी फ़रमा, और उसकी दाख़िले की जगह कुशादा कर दे, और उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे। उसे उसके गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से साफ़ किया जाता है। उसे उसके घर से बेहतर घर दे, उसके ख़ानदान से बेहतर ख़ानदान, और उसकी बीवी से बेहतर बीवी। उसे जन्नत में दाख़िल कर, और उसे क़ब्र के अज़ाब से [और जहन्नम के अज़ाब से] बचा।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma’ghfir lahu warḥamh, wa `āfihi, wa`fu `anh, wa akrim nuzulah, wa wassi` mudkhalah, wagh’silhu bi ‘lmā'i wath-thalji walbarad, wa naqqihi mina ‘l-khaṭāyā kamā naqqaytath-thawba ‘l-abyaḍa minad-danas, wa abdilhu dāran khayran min dārih, wa ahlan khayran min ahlih, wa zawjan khayran min zawjih, wa adkhilhu ‘l-jannah, wa a`idhhu min `adhābi ‘l-qabri [wa `adhābin-nār].

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 2/663। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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