जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ (4 में से 2)

जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir liḥayyinā, wa mayyitinā”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को बख़्श दे”। स्रोत: Ibn Majah 1/480, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ: अरबी पाठ

اللهُمِّ اغْفِرْ لِحَيِّنا وَمَيِّتِنا،وَشاهِدِنا وَغائِبِنا،وَصَغيرِنا وَكَبيرِنا،وَذَكَرِنا وَأُنْثانا.اللهُمِّ مَنْ أَحْيَيْتَهُ مِنّافَأَحْيِهِ عَلى الإِسْلام،وَمَنْ تَوَفَّيْتَهُ مِنّا فَتَوَفَّهُ عَلى الإِيمان،اللهُمِّ لا تَحْرِمْنا أَجْرَه،وَلا تُضِلَّنا بَعْدَه

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma’ghfir liḥayyinā, wa mayyitinā, wa shāhidinā, wa ghā'ibinā, wa ṣaghīrinā wa kabīrinā, wa dhakarinā wa unthānā. Allāhumma man aḥyaytahu minnā fa aḥyihi `ala ‘l-Islām, wa man tawaffaytahu minnā fatawaffahu `alal-īmān, Allāhumma lā taḥrimnā ajrah wa lā tuḍillanā ba`dah.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को बख़्श दे, जो हमारे साथ मौजूद हैं और जो ग़ैर-हाज़िर हैं, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, हमारे मर्दों और हमारी औरतों को। ऐ अल्लाह! हममें से जिसे तू ज़िंदा रखे उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख, और हममें से जिसे तू वफ़ात दे उसे ईमान पर वफ़ात दे। ऐ अल्लाह! हमें उनके अज्र से महरूम न कर और उनके बाद हमें गुमराह न कर।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ibn Majah 1/480।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir liḥayyinā, wa mayyitinā”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को बख़्श दे”। स्रोत: Ibn Majah 1/480, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को बख़्श दे, जो हमारे साथ मौजूद हैं और जो ग़ैर-हाज़िर हैं, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, हमारे मर्दों और हमारी औरतों को। ऐ अल्लाह! हममें से जिसे तू ज़िंदा रखे उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख, और हममें से जिसे तू वफ़ात दे उसे ईमान पर वफ़ात दे। ऐ अल्लाह! हमें उनके अज्र से महरूम न कर और उनके बाद हमें गुमराह न कर।

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma’ghfir liḥayyinā, wa mayyitinā, wa shāhidinā, wa ghā'ibinā, wa ṣaghīrinā wa kabīrinā, wa dhakarinā wa unthānā. Allāhumma man aḥyaytahu minnā fa aḥyihi `ala ‘l-Islām, wa man tawaffaytahu minnā fatawaffahu `alal-īmān, Allāhumma lā taḥrimnā ajrah wa lā tuḍillanā ba`dah.

“जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Ibn Majah 1/480। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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