क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ
क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Assalāmu `alaykum ahlad-diyāri minal-mu'minīna wa ‘l-muslimīn”, और इसका अर्थ है: “ऐ इस बस्ती के रहने वालो! आप पर सलाम हो, मोमिनों और मुसलमानों में से”। स्रोत: Muslim 2/671, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Assalāmu `alaykum ahlad-diyāri minal-mu'minīna wa ‘l-muslimīn, wa innā in shā' Allāhu bikum lāḥiqūn nas'alullāha lanā wa lakumul-`āfiyah.
हिंदी अर्थ
ऐ इस बस्ती के रहने वालो! आप पर सलाम हो, मोमिनों और मुसलमानों में से, और हम, अल्लाह ने चाहा तो, आपसे मिलने वाले हैं। [अल्लाह हममें से पहले जाने वालों पर भी रहम करे और बाद में जाने वालों पर भी] मैं अल्लाह से हमारे लिए और आपके लिए आफ़ियत माँगता हूँ।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/671।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Assalāmu `alaykum ahlad-diyāri minal-mu'minīna wa ‘l-muslimīn”, और इसका अर्थ है: “ऐ इस बस्ती के रहने वालो! आप पर सलाम हो, मोमिनों और मुसलमानों में से”। स्रोत: Muslim 2/671, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ इस बस्ती के रहने वालो! आप पर सलाम हो, मोमिनों और मुसलमानों में से, और हम, अल्लाह ने चाहा तो, आपसे मिलने वाले हैं। [अल्लाह हममें से पहले जाने वालों पर भी रहम करे और बाद में जाने वालों पर भी] मैं अल्लाह से हमारे लिए और आपके लिए आफ़ियत माँगता हूँ।
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Assalāmu `alaykum ahlad-diyāri minal-mu'minīna wa ‘l-muslimīn, wa innā in shā' Allāhu bikum lāḥiqūn nas'alullāha lanā wa lakumul-`āfiyah.
“क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Muslim 2/671। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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