मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत
मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “जिसका आख़िरी कलाम (जिसका मतलब यह है) «अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं» हो, वह जन्नत में दाख़िल होगा”। स्रोत: Abu Dawud 3/190, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Lā ilāha illallāh
हिंदी अर्थ
जिसका आख़िरी कलाम (जिसका मतलब यह है) «अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं» हो, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 3/190।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “जिसका आख़िरी कलाम (जिसका मतलब यह है) «अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं» हो, वह जन्नत में दाख़िल होगा”। स्रोत: Abu Dawud 3/190, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” की दुआ का अर्थ क्या है?
जिसका आख़िरी कलाम (जिसका मतलब यह है) «अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं» हो, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh
“मरने के क़रीब शख़्स के लिए हिदायत” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 3/190। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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