ताज़ियत की दुआ
ताज़ियत की दुआ। मरीज़ की इयादत, दर्द, जनाज़ा, ताज़ियत।
“ताज़ियत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“ताज़ियत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Inna lillāhi mā akhadh”, और इसका अर्थ है: “बेशक अल्लाह ही का है जो वह ले ले”। स्रोत: Al-Bukhari 2/80, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
ताज़ियत की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Inna lillāhi mā akhadh, wa lahu mā a`tā, wa kullu shay'in `indahu bi ajalin musammā . . . faltaṣbir wa ‘l-taḥtasib . [Also good to say:] A`ẓamallāhu ajrak, wa 'aḥsana `azā'ak, wa ghafara limayyitik.
हिंदी अर्थ
बेशक अल्लाह ही का है जो वह ले ले, और उसी का है जो वह दे, और हर चीज़ के लिए उसके यहाँ एक मुक़र्रर वक़्त है... तो सब्र करो और अज्र पाओ। अल्लाह तुम्हारा अज्र बढ़ाए, तुम्हारे ग़म का अच्छा बदला दे और तुम्हारे फ़ौत हुए को बख़्श दे।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “ताज़ियत की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 2/80।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“ताज़ियत की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“ताज़ियत की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Inna lillāhi mā akhadh”, और इसका अर्थ है: “बेशक अल्लाह ही का है जो वह ले ले”। स्रोत: Al-Bukhari 2/80, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“ताज़ियत की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
बेशक अल्लाह ही का है जो वह ले ले, और उसी का है जो वह दे, और हर चीज़ के लिए उसके यहाँ एक मुक़र्रर वक़्त है... तो सब्र करो और अज्र पाओ। अल्लाह तुम्हारा अज्र बढ़ाए, तुम्हारे ग़म का अच्छा बदला दे और तुम्हारे फ़ौत हुए को बख़्श दे।
“ताज़ियत की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Inna lillāhi mā akhadh, wa lahu mā a`tā, wa kullu shay'in `indahu bi ajalin musammā . . . faltaṣbir wa ‘l-taḥtasib . [Also good to say:] A`ẓamallāhu ajrak, wa 'aḥsana `azā'ak, wa ghafara limayyitik.
“ताज़ियत की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari 2/80। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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