सफ़र की दुआ

सफ़र की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।

“सफ़र की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“सफ़र की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Allāhu Akbar”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है”। स्रोत: Muslim 2/978, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सफ़र की दुआ: अरबी पाठ

«اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ،﴿سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَوَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ﴾اللَّهُمَّ إِنّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا البِرَّ وَالتَّقْوَى،وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى،اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَاوَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ،اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ،وَالْخَليفَةُ فِي الْأَهْلِ،اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ،وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ،وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالْأَهْلِ»،
وإذا رَجَعَ قَالَهُنَّ وَزَادَ فِيهِنَّ:«آيِبُونَ، تائِبُونَ، عَابِدُونَ،لِرَبِّنَا حَامِدُونَ».

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Subḥāna ‘l-ladhi sakhkhara lanā hādhā wa mā kunnā lahu muqrinīn. Wa innā ilā Rabbinā lamunqalibūn. Allāhumma innā nas'aluka fī safarinā hādha ‘l-birra wat-taqwā, Wa mina ‘l-`amali mā tarḍā, Allāhumma hawwin `alaynā safaranā hādhā waṭwi `annā bu`dah, Allāhumma antas-sāḥibu fis-safar, wa ‘l-khalīfatu fil-ahl, Allāhumma innī a`ūdhu bika min wa`thā'is-safar, wa ka'ābati ‘l-manẓar, wa sū'il-munqalabi fil-māli wa ‘l-ahl. (Upon returning recite the same again adding): Ā’ibūna, tā'ibūna, `ābidūn, Li Rabbinā ḥāmidūn.

हिंदी अर्थ

अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे लिए मुसख़्ख़र कर दिया हालाँकि हम इसे अपने बस में नहीं कर सकते थे। बेशक हम अपने रब ही की ओर लौटने वाले हैं। ऐ अल्लाह! हम अपने इस सफ़र में तुझसे नेकी और तक़वा, और ऐसे आमाल माँगते हैं जिनसे तू राज़ी हो। ऐ अल्लाह! हमारे लिए इस सफ़र को आसान कर दे और इसकी दूरी हमारे लिए समेट दे। ऐ अल्लाह! तू सफ़र में हमारा साथी है और घर वालों में हमारा निगहबान है। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इस सफ़र की मशक़्क़त से, बुरे मनाज़िर देखने से और वापसी पर अपने घर वालों और माल को किसी मुसीबत में पाने से। (वापसी पर यही दुआ दोबारा पढ़ें और यह इज़ाफ़ा करें:) हम तौबा करते हुए, इबादत करते हुए और अपने रब की तारीफ़ करते हुए लौटने वाले हैं।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सफ़र की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/978।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सफ़र की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“सफ़र की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Allāhu Akbar”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है”। स्रोत: Muslim 2/978, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सफ़र की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे लिए मुसख़्ख़र कर दिया हालाँकि हम इसे अपने बस में नहीं कर सकते थे। बेशक हम अपने रब ही की ओर लौटने वाले हैं। ऐ अल्लाह! हम अपने इस सफ़र में तुझसे नेकी और तक़वा, और ऐसे आमाल माँगते हैं जिनसे तू राज़ी हो। ऐ अल्लाह! हमारे लिए इस सफ़र को आसान कर दे और इसकी दूरी हमारे लिए समेट दे। ऐ अल्लाह! तू सफ़र में हमारा साथी है और घर वालों में हमारा निगहबान है। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इस सफ़र की मशक़्क़त से, बुरे मनाज़िर देखने से और वापसी पर अपने घर वालों और माल को किसी मुसीबत में पाने से। (वापसी पर यही दुआ दोबारा पढ़ें और यह इज़ाफ़ा करें:) हम तौबा करते हुए, इबादत करते हुए और अपने रब की तारीफ़ करते हुए लौटने वाले हैं।

“सफ़र की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Allāhu Akbar, Subḥāna ‘l-ladhi sakhkhara lanā hādhā wa mā kunnā lahu muqrinīn. Wa innā ilā Rabbinā lamunqalibūn. Allāhumma innā nas'aluka fī safarinā hādha ‘l-birra wat-taqwā, Wa mina ‘l-`amali mā tarḍā, Allāhumma hawwin `alaynā safaranā hādhā waṭwi `annā bu`dah, Allāhumma antas-sāḥibu fis-safar, wa ‘l-khalīfatu fil-ahl, Allāhumma innī a`ūdhu bika min wa`thā'is-safar, wa ka'ābati ‘l-manẓar, wa sū'il-munqalabi fil-māli wa ‘l-ahl. Ā’ibūna, tā'ibūna, `ābidūn, Li Rabbinā ḥāmidūn.

“सफ़र की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 2/978। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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