बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ
बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/291, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, Lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd, Yuḥyī wa yumīt, wa huwa ḥayyun lā yamūt, Biyadihi ‘l-khayr, wa huwa `alā kulli shay'in Qadīr.
हिंदी अर्थ
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है। वही ज़िंदा करता है और वही मौत देता है, और वह ज़िंदा है, उसे मौत नहीं आती। उसी के हाथ में सारी भलाई है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 5/291।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/291, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है। वही ज़िंदा करता है और वही मौत देता है, और वह ज़िंदा है, उसे मौत नहीं आती। उसी के हाथ में सारी भलाई है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, Lahu ‘l-mulku wa lahu ‘l-ḥamd, Yuḥyī wa yumīt, wa huwa ḥayyun lā yamūt, Biyadihi ‘l-khayr, wa huwa `alā kulli shay'in Qadīr.
“बाज़ार में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 5/291। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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