रुकूअ से उठने की दुआ (3 में से 3)

रुकूअ से उठने की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“रुकूअ से उठने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “रुकूअ से उठने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Mil'a 's-samāwāti wa mil'a 'l-'arḍi wa mā baynahumā”, और इसका अर्थ है: “(ऐसी तारीफ़) जो आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को भर दे”। स्रोत: Muslim 1/346, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

रुकूअ से उठने की दुआ: अरबी पाठ

مِلْءَ السَّمواتِ وَمِلْءَ الأَرْض، وَما بَيْنَهُما،وَمِلْءَ ما شِئْتَ مِنْ شَيءٍ بَعْد.أَهلَ الثَّناءِ وَالمَجد،أََحَقُّ ما قالَ العَبْد،وَكُلُّنا لَكَ عَبد.اللّهُمَّ لا مانِعَ لِما أَعْطَيْت،وَلا مُعْطِيَ لِما مَنَعْت،وَلا يَنْفَعُ ذا الجَدِّ مِنْكَ الجَد

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Mil'a 's-samāwāti wa mil'a 'l-'arḍi wa mā baynahumā, wa mil'a mā shi'ta min shay'in ba`d. 'Ahla 'th-thanā'i wa 'l-majdi, 'aḥaqqu mā qāla 'l-`abdu, wa kullunā laka `abdun. Allāhumma lā māni`a limā 'a`ṭayta, wa lā mu`ṭiya limā mana`ta, wa lā yanfa`u dhal-jaddi minka 'l-jadd. .

हिंदी अर्थ

(ऐसी तारीफ़) जो आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को भर दे, और इसके सिवा भी जो तू चाहे। (ऐ अल्लाह) तू तारीफ़ और बुज़ुर्गी का सबसे ज़्यादा हक़दार है, और बंदे ने जो कहा—हम सब तेरे बंदे हैं। ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं। और किसी शान वाले की शान तेरे मुक़ाबले में उसे कोई फ़ायदा नहीं देती।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “रुकूअ से उठने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 1/346।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“रुकूअ से उठने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “रुकूअ से उठने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Mil'a 's-samāwāti wa mil'a 'l-'arḍi wa mā baynahumā”, और इसका अर्थ है: “(ऐसी तारीफ़) जो आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को भर दे”। स्रोत: Muslim 1/346, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“रुकूअ से उठने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

(ऐसी तारीफ़) जो आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को भर दे, और इसके सिवा भी जो तू चाहे। (ऐ अल्लाह) तू तारीफ़ और बुज़ुर्गी का सबसे ज़्यादा हक़दार है, और बंदे ने जो कहा—हम सब तेरे बंदे हैं। ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं। और किसी शान वाले की शान तेरे मुक़ाबले में उसे कोई फ़ायदा नहीं देती।

“रुकूअ से उठने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Mil'a 's-samāwāti wa mil'a 'l-'arḍi wa mā baynahumā, wa mil'a mā shi'ta min shay'in ba`d. 'Ahla 'th-thanā'i wa 'l-majdi, 'aḥaqqu mā qāla 'l-`abdu, wa kullunā laka `abdun. Allāhumma lā māni`a limā 'a`ṭayta, wa lā mu`ṭiya limā mana`ta, wa lā yanfa`u dhal-jaddi minka 'l-jadd. .

“रुकूअ से उठने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 1/346। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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