मस्जिद जाने की दुआ

मस्जिद जाने की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“मस्जिद जाने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मस्जिद जाने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhummaj'al fī qalbī nūran”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे”। स्रोत: Al-Bukhari 11 /116, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

मस्जिद जाने की दुआ: अरबी पाठ

اللّهُمَّ اجْعَلْ فِي قَلْبي نُوراً،وَفي لِسَانِي نُوراً،وَفِي سَمْعِي نُوراً،وَفِي بَصَرِيِ نُوراً،وَمِنْ فََوْقِي نُوراً،وَ مِنْ تَحْتِي نُوراً،وَ عَنْ يَمِينيِ نُوراَ،وعَنْ شِمَالِي نُوراً،وَمْن أَماَمِي نُوراً،وَمِنْ خَلْفيِ نُوراَ،واجْعَلْ فِي نَفْسِي نُوراً،وأَعْظِمْ لِي نُوراً،وَعظِّمْ لِي نُوراً،وَاجْعَلْ لِي نُوراً،واجْعَلنِي نُوراً،أللَّهُمَّ أَعْطِنِي نُوراً،واجْعَلْ فِي عَصَبِي نُوراً،وَفِي لَحْمِي نُوراً،وَفِي دَمِي نُوراًوَفِي شَعْرِي نُوراً،وفِي بَشَرِي نُوراً(أَللَّهُمَّ اجِعَلْ لِي نُوراً فِي قّبْرِيوَ نُوراَ فِي عِظاَمِي)(وَزِدْنِي نُوراً،وَزِدْنِي نُوراَ،وَزِدْنِي نُوراً)(وَهَبْ لِي نُوراً عَلَى نُوراً )

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhummaj'al fī qalbī nūran, wa fī lisānī nūran, wa fī sam`ī nūran, wa fī baṣarī nūran, wa min fawqī nūran, wa min taḥtī nūran, wa `an yamīnī nūran, wa `an shimālī nūran, wa min 'amāmī nūran, wa min khalfī nūran, waj`al fī nafsī nūran, wa 'a`ẓim lī nūran, wa `ẓẓim lī nūran, waj`allī nūran, waj`alnī nūran, Allāhumma 'a`tinī nūran, waj'al fī `aṣabī nūran, wa fī laḥmī nūran, wa fī damī nūran, wa fī sha`rī nūran, wa fī basharī nūran. [Allāhummaj`allī nūran fī qabrī wa nūran fī `iẓāmī.] [Wa zidnī nūran, wa zidnī nūran, wa zidnī nūran.] [Wa hab lī nūran `alā nūr.]

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी ज़बान में नूर, मेरे कानों में नूर, मेरी निगाह में नूर, मेरे ऊपर नूर, मेरे नीचे नूर, मेरे दाएँ नूर, मेरे बाएँ नूर, मेरे आगे नूर और मेरे पीछे नूर। मेरी जान में नूर रख दे। मेरे लिए नूर को बड़ा कर दे, और मेरे लिए नूर को बढ़ा दे। मेरे लिए नूर बना दे और मुझे नूर बना दे। ऐ अल्लाह! मुझे नूर अता कर, और मेरी नसों में नूर रख दे, मेरे जिस्म में नूर मेरे ख़ून में नूर मेरे बालों में नूर और मेरी त्वचा में नूर। [ऐ अल्लाह! मेरी क़ब्र में मेरे लिए नूर बना दे... और मेरी हड्डियों में नूर।] (तिर्मिज़ी 5/483, हदीस नं. 3419।) [मुझे नूर में बढ़ा, मुझे नूर में बढ़ा, मुझे नूर में बढ़ा।] (बुख़ारी, अल-अदब अल-मुफ़रद, हदीस नं. 695, पृ. 258। नीज़ अल्बानी, सहीह अल-अदब अल-मुफ़रद, नं. 536।) [मुझे नूर पर नूर अता फ़रमा।] (बुख़ारी; नीज़ इब्ने-हजर, फ़त्हुल-बारी 11/118।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मस्जिद जाने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 11 /116।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“मस्जिद जाने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मस्जिद जाने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhummaj'al fī qalbī nūran”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे”। स्रोत: Al-Bukhari 11 /116, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“मस्जिद जाने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी ज़बान में नूर, मेरे कानों में नूर, मेरी निगाह में नूर, मेरे ऊपर नूर, मेरे नीचे नूर, मेरे दाएँ नूर, मेरे बाएँ नूर, मेरे आगे नूर और मेरे पीछे नूर। मेरी जान में नूर रख दे। मेरे लिए नूर को बड़ा कर दे, और मेरे लिए नूर को बढ़ा दे। मेरे लिए नूर बना दे और मुझे नूर बना दे। ऐ अल्लाह! मुझे नूर अता कर, और मेरी नसों में नूर रख दे, मेरे जिस्म में नूर मेरे ख़ून में नूर मेरे बालों में नूर और मेरी त्वचा में नूर। [ऐ अल्लाह! मेरी क़ब्र में मेरे लिए नूर बना दे... और मेरी हड्डियों में नूर।] (तिर्मिज़ी 5/483, हदीस नं. 3419।) [मुझे नूर में बढ़ा, मुझे नूर में बढ़ा, मुझे नूर में बढ़ा।] (बुख़ारी, अल-अदब अल-मुफ़रद, हदीस नं. 695, पृ. 258। नीज़ अल्बानी, सहीह अल-अदब अल-मुफ़रद, नं. 536।) [मुझे नूर पर नूर अता फ़रमा।] (बुख़ारी; नीज़ इब्ने-हजर, फ़त्हुल-बारी 11/118।).

“मस्जिद जाने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhummaj'al fī qalbī nūran, wa fī lisānī nūran, wa fī sam`ī nūran, wa fī baṣarī nūran, wa min fawqī nūran, wa min taḥtī nūran, wa `an yamīnī nūran, wa `an shimālī nūran, wa min 'amāmī nūran, wa min khalfī nūran, waj`al fī nafsī nūran, wa 'a`ẓim lī nūran, wa `ẓẓim lī nūran, waj`allī nūran, waj`alnī nūran, Allāhumma 'a`tinī nūran, waj'al fī `aṣabī nūran, wa fī laḥmī nūran, wa fī damī nūran, wa fī sha`rī nūran, wa fī basharī nūran. [Allāhummaj`allī nūran fī qabrī wa nūran fī `iẓāmī.] [Wa zidnī nūran, wa zidnī nūran, wa zidnī nūran.] [Wa hab lī nūran `alā nūr.]

“मस्जिद जाने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 11 /116। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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