मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Aʿūdhu billāhil-ʿaẓīm, wa bi-wajhihil-karīm, wa sulṭānihil-qadīm, minash-shayṭānir-rajīm. Bismillāh, waṣ-ṣalātu…”, और इसका अर्थ है: “मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Abu Dawud 1/126, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ: अरबी पाठ

أَعوذُ باللهِ العَظيموَبِوَجْهِهِ الكَرِيموَسُلْطانِه القَديممِنَ الشّيْطانِ الرَّجيم،
[ بِسْمِ الله، وَالصَّلاةُ وَالسَّلامُ عَلى رَسولِالله]،اللّهُمَّ افْتَحْ لي أَبْوابَ رَحْمَتِك

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Aʿūdhu billāhil-ʿaẓīm, wa bi-wajhihil-karīm, wa sulṭānihil-qadīm, minash-shayṭānir-rajīm. Bismillāh, waṣ-ṣalātu was-salāmu ʿalā rasūlillāh. Allāhumma iftaḥ lī abwāba raḥmatik.

हिंदी अर्थ

मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह माँगता हूँ, उसके करीम चेहरे के वसीले से, उसकी क़दीम ताक़त के वसीले से, मरदूद शैतान से। [अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद और सलाम हो। ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 1/126।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Aʿūdhu billāhil-ʿaẓīm, wa bi-wajhihil-karīm, wa sulṭānihil-qadīm, minash-shayṭānir-rajīm. Bismillāh, waṣ-ṣalātu…”, और इसका अर्थ है: “मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Abu Dawud 1/126, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह माँगता हूँ, उसके करीम चेहरे के वसीले से, उसकी क़दीम ताक़त के वसीले से, मरदूद शैतान से। [अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद और सलाम हो। ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Aʿūdhu billāhil-ʿaẓīm, wa bi-wajhihil-karīm, wa sulṭānihil-qadīm, minash-shayṭānir-rajīm. Bismillāh, waṣ-ṣalātu was-salāmu ʿalā rasūlillāh. Allāhumma iftaḥ lī abwāba raḥmatik.

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 1/126। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 1 बार।

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