क़ुनूत-ए-वित्र (3 में से 1)

क़ुनूत-ए-वित्र। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’hdinī fī man hadayt”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों के साथ हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी”। स्रोत: At-Tirmidhi 1/144, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

क़ुनूत-ए-वित्र: अरबी पाठ

اللّهُمَّ اهْدِني فيمَنْ هَدَيْت،وَعافِني فيمَنْ عافَيْت،وَتَوَلَّني فيمَنْ تَوَلَّيْت،وَبارِكْ لي فيما أَعْطَيْت،وَقِني شَرَّ ما قَضَيْت،فَإِنَّكَ تَقْضي وَلا يُقْضى عَلَيْك،إِنَّهُ لا يَذِلُّ مَنْ والَيْت،
[ وَلا يَعِزُّ مَن عادَيْت ]،تَبارَكْتَ رَبَّنا وَتَعالَيْت

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma’hdinī fī man hadayt, wa `āfinī fī man `āfayt, wa tawallanī fī man tawallayt, wa bārik lī fī mā a`atayt, wa qinī sharra mā qaḍayt, fa innaka taqḍī wa lā yuqḍā `alayk, innahu lā yadhillu man wālayt, [wa lā ya`izzu man `ādayt] , tabārakta Rabbanā wa ta`ālayt.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों के साथ हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी, और उनके साथ मुझे आफ़ियत दे जिन्हें तूने आफ़ियत दी। उनके साथ मुझे अपनी सरपरस्ती में ले जिन्हें तूने अपनी सरपरस्ती में लिया। जो कुछ तूने मुझे दिया उसमें बरकत दे। और मुझे उस बुराई से बचा जिसका तूने फ़ैसला किया। बेशक तू हुक्म देता है और तुझे हुक्म नहीं दिया जाता, और जिसे तू अपनी सरपरस्ती में ले वह कभी ज़लील नहीं होता [और जिसे तू दुश्मन बना ले उसे कभी इज़्ज़त नहीं मिलती]। ऐ हमारे रब! तू बाबरकत और बुलंद है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “क़ुनूत-ए-वित्र” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 1/144।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’hdinī fī man hadayt”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों के साथ हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी”। स्रोत: At-Tirmidhi 1/144, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों के साथ हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी, और उनके साथ मुझे आफ़ियत दे जिन्हें तूने आफ़ियत दी। उनके साथ मुझे अपनी सरपरस्ती में ले जिन्हें तूने अपनी सरपरस्ती में लिया। जो कुछ तूने मुझे दिया उसमें बरकत दे। और मुझे उस बुराई से बचा जिसका तूने फ़ैसला किया। बेशक तू हुक्म देता है और तुझे हुक्म नहीं दिया जाता, और जिसे तू अपनी सरपरस्ती में ले वह कभी ज़लील नहीं होता [और जिसे तू दुश्मन बना ले उसे कभी इज़्ज़त नहीं मिलती]। ऐ हमारे रब! तू बाबरकत और बुलंद है।

“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma’hdinī fī man hadayt, wa `āfinī fī man `āfayt, wa tawallanī fī man tawallayt, wa bārik lī fī mā a`atayt, wa qinī sharra mā qaḍayt, fa innaka taqḍī wa lā yuqḍā `alayk, innahu lā yadhillu man wālayt, [wa lā ya`izzu man `ādayt] , tabārakta Rabbanā wa ta`ālayt.

“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 1/144। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

और दुआएँ: मस्जिद और नमाज़ · सभी दुआएँ