क़ुनूत-ए-वित्र (3 में से 2)
क़ुनूत-ए-वित्र। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।
“क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī a`ūdhu biriḍāka min sakhaṭik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के ज़रिये तेरे ग़ुस्से से पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/180, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
क़ुनूत-ए-वित्र: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma innī a`ūdhu biriḍāka min sakhaṭik, wa bimu`āfātika min `uqūbatik, wa a`ūdhu bika mink, lā uḥṣī thanā'an `alayk, Anta kamā athnayta `alā nafsik.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के ज़रिये तेरे ग़ुस्से से पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी माफ़ी के ज़रिये तेरे अज़ाब से पनाह माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरी ही पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी तारीफ़ें गिन नहीं सकता, तू वैसा ही है जैसी तूने ख़ुद अपनी तारीफ़ की।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “क़ुनूत-ए-वित्र” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/180।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “क़ुनूत-ए-वित्र” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī a`ūdhu biriḍāka min sakhaṭik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के ज़रिये तेरे ग़ुस्से से पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/180, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के ज़रिये तेरे ग़ुस्से से पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी माफ़ी के ज़रिये तेरे अज़ाब से पनाह माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरी ही पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी तारीफ़ें गिन नहीं सकता, तू वैसा ही है जैसी तूने ख़ुद अपनी तारीफ़ की।
“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī a`ūdhu biriḍāka min sakhaṭik, wa bimu`āfātika min `uqūbatik, wa a`ūdhu bika mink, lā uḥṣī thanā'an `alayk, Anta kamā athnayta `alā nafsik.
“क़ुनूत-ए-वित्र” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 3/180। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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