सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 4)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā wa-aṣbaḥal-mulku lillāh, wal-ḥamdu lillāh, lā ilāha illa-llāhu waḥdahū…”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ सारी बादशाहत अल्लाह की है। प्रशंसा अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Muslim 4/2088, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ،لاَ إِلَهَ إلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ،لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ،رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَخَيرَ مَا بَعْدَهُ،وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ،رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ،رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي القَبْر.

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Aṣbaḥnā wa-aṣbaḥal-mulku lillāh, wal-ḥamdu lillāh, lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ʿalā kulli shayʾin qadīr. Rabbi asʾaluka khayra mā fī hādhal-yawm, wa khayra mā baʿdah, wa aʿūdhu bika min sharri mā fī hādhal-yawm wa sharri mā baʿdah. Rabbi aʿūdhu bika minal-kasali wa sūʾil-kibar. Rabbi aʿūdhu bika min ʿadhābin fin-nāri wa ʿadhābin fil-qabr.

हिंदी अर्थ

हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ सारी बादशाहत अल्लाह की है। प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। अल्लाह ही की बादशाहत है, उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस दिन की भलाई और इसके बाद आने वाले दिनों की भलाई माँगता हूँ, और तेरी पनाह माँगता हूँ इस दिन की बुराई से और इसके बाद आने वाले दिनों की बुराई से। ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ सुस्ती और नाताक़त बुढ़ापे से। ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से और क़ब्र के अज़ाब से।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2088।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā wa-aṣbaḥal-mulku lillāh, wal-ḥamdu lillāh, lā ilāha illa-llāhu waḥdahū…”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ सारी बादशाहत अल्लाह की है। प्रशंसा अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Muslim 4/2088, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ सारी बादशाहत अल्लाह की है। प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। अल्लाह ही की बादशाहत है, उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस दिन की भलाई और इसके बाद आने वाले दिनों की भलाई माँगता हूँ, और तेरी पनाह माँगता हूँ इस दिन की बुराई से और इसके बाद आने वाले दिनों की बुराई से। ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ सुस्ती और नाताक़त बुढ़ापे से। ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से और क़ब्र के अज़ाब से।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Aṣbaḥnā wa-aṣbaḥal-mulku lillāh, wal-ḥamdu lillāh, lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ʿalā kulli shayʾin qadīr. Rabbi asʾaluka khayra mā fī hādhal-yawm, wa khayra mā baʿdah, wa aʿūdhu bika min sharri mā fī hādhal-yawm wa sharri mā baʿdah. Rabbi aʿūdhu bika minal-kasali wa sūʾil-kibar. Rabbi aʿūdhu bika min ʿadhābin fin-nāri wa ʿadhābin fil-qabr.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 4/2088। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 1 बार।

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