सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 2)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aʿūdhu billāhi minash-shayṭānir-rajīm. Allāhu lā ilāha illā Huwa, al-Ḥayyul-Qayyūm…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है”। स्रोत: Al-Qur'an 2:255, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

(أعوذ بالله من الشيطان الرجيم)﴿اللّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُلاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌلَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِمَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِيَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْوَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءوَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضَوَلاَ يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَاوَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴾

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Aʿūdhu billāhi minash-shayṭānir-rajīm. Allāhu lā ilāha illā Huwa, al-Ḥayyul-Qayyūm. Lā taʾkhudhuhū sinatun wa lā nawm. Lahū mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ. Man dhalladhī yashfaʿu ʿindahū illā bi-idhnih. Yaʿlamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥīṭūna bi-shayʾim min ʿilmihī illā bimā shāʾ. Wasiʿa kursiyyuhus-samāwāti wal-arḍ, wa lā yaʾūduhū ḥifẓuhumā, wa Huwal-ʿAliyyul-ʿAẓīm.

हिंदी अर्थ

अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके सामने सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो कुछ उनके साथ दुनिया में होता है और जो आख़िरत में होगा। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का घेराव नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वही बुलंद और अज़ीम है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Qur'an 2:255।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aʿūdhu billāhi minash-shayṭānir-rajīm. Allāhu lā ilāha illā Huwa, al-Ḥayyul-Qayyūm…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है”। स्रोत: Al-Qur'an 2:255, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके सामने सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो कुछ उनके साथ दुनिया में होता है और जो आख़िरत में होगा। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का घेराव नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वही बुलंद और अज़ीम है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Aʿūdhu billāhi minash-shayṭānir-rajīm. Allāhu lā ilāha illā Huwa, al-Ḥayyul-Qayyūm. Lā taʾkhudhuhū sinatun wa lā nawm. Lahū mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ. Man dhalladhī yashfaʿu ʿindahū illā bi-idhnih. Yaʿlamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥīṭūna bi-shayʾim min ʿilmihī illā bimā shāʾ. Wasiʿa kursiyyuhus-samāwāti wal-arḍ, wa lā yaʾūduhū ḥifẓuhumā, wa Huwal-ʿAliyyul-ʿAẓīm.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Qur'an 2:255। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 1 बार।

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