सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 5)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma bika aṣbaḥnā, wa bika amsaynā, wa bika naḥyā…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तेरे ही सहारे हमने सुबह की और तेरे ही सहारे हमने शाम की”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنا وَبِكَ أَمْسَيناوَبِكَ نَحْيا وَبِكَ نَموتُوَإِلَيْكَ النِّشور
وإذا أمسي فليقل:اللهم بك أمسينا وبك أصبحناوبك نحيا وبك نموتوإليك المصير

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma bika aṣbaḥnā, wa bika amsaynā, wa bika naḥyā, wa bika namūt, wa ilaykan-nushūr.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! तेरे ही सहारे हमने सुबह की और तेरे ही सहारे हमने शाम की, तेरे ही सहारे हम जीते हैं और तेरे ही सहारे मरते हैं, और तेरी ही ओर लौटकर जाना है। ऐ अल्लाह! तू हमें दिन का अंत भी उसी तरह दिखाता है जैसे उसका आरंभ, तू हमें ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और तेरी ही ओर हमारा अंजाम है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma bika aṣbaḥnā, wa bika amsaynā, wa bika naḥyā…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तेरे ही सहारे हमने सुबह की और तेरे ही सहारे हमने शाम की”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! तेरे ही सहारे हमने सुबह की और तेरे ही सहारे हमने शाम की, तेरे ही सहारे हम जीते हैं और तेरे ही सहारे मरते हैं, और तेरी ही ओर लौटकर जाना है। ऐ अल्लाह! तू हमें दिन का अंत भी उसी तरह दिखाता है जैसे उसका आरंभ, तू हमें ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और तेरी ही ओर हमारा अंजाम है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma bika aṣbaḥnā, wa bika amsaynā, wa bika naḥyā, wa bika namūt, wa ilaykan-nushūr.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 3/142। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 1 बार।

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