सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 1)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Alḥamdulillahi waḥdah”, और इसका अर्थ है: “सारी प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Abu Dawud 2/698, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

الْحَمْدُ لِلَّهِ وَحْدَهُ،وَالصَّلاَةُ وَالسَّلاَمُ عَلَى مَنْ لاَ نَبِيَّ بَعْدَهُ

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Alḥamdulillahi waḥdah waṣ-ṣalatu was-salam `alā man lā nabiyya ba`dah.

हिंदी अर्थ

सारी प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है, और दुरूद व सलाम हो उस हस्ती पर जिसके बाद कोई नबी नहीं।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 2/698।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Alḥamdulillahi waḥdah”, और इसका अर्थ है: “सारी प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Abu Dawud 2/698, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

सारी प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है, और दुरूद व सलाम हो उस हस्ती पर जिसके बाद कोई नबी नहीं।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Alḥamdulillahi waḥdah waṣ-ṣalatu was-salam `alā man lā nabiyya ba`dah.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 2/698। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

और दुआएँ: सुबह और शाम · सभी दुआएँ