सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 3)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है”। स्रोत: Abu Dawud 4/322, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

بسم الله الرحمن الرحيم﴿قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌاللَّهُ الصَّمَدُلَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُواً أَحَدٌ﴾
بسم الله الرحمن الرحيم﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِمِن شَرِّ مَا خَلَقَوَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَوَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِوَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ﴾
بسم الله الرحمن الرحيم﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِمَلِكِ النَّاسِإِلَهِ النَّاسِمِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِالَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِمِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ﴾(ثلاث مرات)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul huwallāhu aḥad. Allāhuṣ-ṣamad. Lam yalid wa lam yūlad. Wa lam yakun lahu kufuwan aḥad. Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul a`ūdhu birabbil-falaq. Min sharri mā khalaq. Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab. Wa min sharrin-naffāthāti fil-`uqad. Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad. Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul a`ūdhu birabbin-nās. Malikin-nās. 'Ilāhin-nās. Min sharri ‘l-waswāsil-khannās. Alladhī yuwaswisu fī ṣudūrin-nās. Minal-jinnati wannās.

हिंदी अर्थ

अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है, सब उसके मोहताज हैं, न उसने किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसका हमसर नहीं। अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: मैं सुबह के रब (अल्लाह) की पनाह माँगता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की, और अँधेरी रात की बुराई से जब वह अपने अँधेरे के साथ छा जाए, और गिरहों में फूँकने वालियों (जादू करने वालों) की बुराई से, और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे। अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: मैं लोगों के रब (अल्लाह) की पनाह माँगता हूँ, लोगों के बादशाह, लोगों के माबूद की, वसवसा डालकर पीछे हट जाने वाले की बुराई से, जो लोगों के सीनों में वसवसे डालता है, चाहे जिन्नों में से हो या इंसानों में से।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/322।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है”। स्रोत: Abu Dawud 4/322, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है, सब उसके मोहताज हैं, न उसने किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसका हमसर नहीं। अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: मैं सुबह के रब (अल्लाह) की पनाह माँगता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की, और अँधेरी रात की बुराई से जब वह अपने अँधेरे के साथ छा जाए, और गिरहों में फूँकने वालियों (जादू करने वालों) की बुराई से, और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे। अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम वाला है। कहो: मैं लोगों के रब (अल्लाह) की पनाह माँगता हूँ, लोगों के बादशाह, लोगों के माबूद की, वसवसा डालकर पीछे हट जाने वाले की बुराई से, जो लोगों के सीनों में वसवसे डालता है, चाहे जिन्नों में से हो या इंसानों में से।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul huwallāhu aḥad. Allāhuṣ-ṣamad. Lam yalid wa lam yūlad. Wa lam yakun lahu kufuwan aḥad. Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul a`ūdhu birabbil-falaq. Min sharri mā khalaq. Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab. Wa min sharrin-naffāthāti fil-`uqad. Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad. Bismillāhir-Raḥmānir-Raḥīm. Qul a`ūdhu birabbin-nās. Malikin-nās. 'Ilāhin-nās. Min sharri ‘l-waswāsil-khannās. Alladhī yuwaswisu fī ṣudūrin-nās. Minal-jinnati wannās.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/322। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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