सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 7)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī aṣbaḥtu ush-hiduka”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैंने नई सुबह की और मैं तुझे, तेरे अर्श उठाने वालों को”। स्रोत: Abu Dawud 4/317, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أَُشْهِدُك،وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِك،وَمَلائِكَتِك، وَجَميعَ خَلْقِك،أَنَّكَ أَنْتَ اللهُ لا إلهَ إلاّ أَنْتَوَحْدَكَ لا شَريكَ لَك،وَأَنَّ ُ مُحَمّداً عَبْدُكَ وَرَسولُك.(أربع مرات حينَ يصْبِح أوْ يمسي)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma innī aṣbaḥtu ush-hiduka wa ush-hidu ḥamalata `arshik, wa malā'ikataka wajamī`a khalqik, annaka antallāhu lā ilāha illā ant, waḥdaka lā sharīka lak, wa anna Muḥammadan `abduka wa rasūluk.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैंने नई सुबह की और मैं तुझे, तेरे अर्श उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों को और सारी मख़लूक़ को पुकारता हूँ कि गवाह रहें कि बेशक तू अल्लाह है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं, और यह कि मुहम्मद ﷺ तेरे बंदे और तेरे रसूल हैं। (अरबी में चार बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/317।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī aṣbaḥtu ush-hiduka”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैंने नई सुबह की और मैं तुझे, तेरे अर्श उठाने वालों को”। स्रोत: Abu Dawud 4/317, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मैंने नई सुबह की और मैं तुझे, तेरे अर्श उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों को और सारी मख़लूक़ को पुकारता हूँ कि गवाह रहें कि बेशक तू अल्लाह है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं, और यह कि मुहम्मद ﷺ तेरे बंदे और तेरे रसूल हैं। (अरबी में चार बार पढ़ें।).

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī aṣbaḥtu ush-hiduka wa ush-hidu ḥamalata `arshik, wa malā'ikataka wajamī`a khalqik, annaka antallāhu lā ilāha illā ant, waḥdaka lā sharīka lak, wa anna Muḥammadan `abduka wa rasūluk.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/317। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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