सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 9)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma ʿāfinī fī badanī, Allāhumma ʿāfinī fī samʿī, Allāhumma…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मेरे जिस्म को आफ़ियत दे”। स्रोत: Abu Dawud 4/324, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ عافِني في بَدَني،اللّهُمَّ عافِني في سَمْعي،اللّهُمَّ عافِني في بَصَري،لا إلهَ إلاّ اللّه أَنْتَ.اللّهُمَّ إِنّي أَعوذُبِكَ مِنَ الْكُفر، وَالفَقْر،وَأَعوذُ بِكَ مِنْ عَذابِ القَبْر،لا إلهَ إلاّ أَنْتَ.(ثلاث مرات)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma ʿāfinī fī badanī, Allāhumma ʿāfinī fī samʿī, Allāhumma ʿāfinī fī baṣarī, lā ilāha illā ant. Allāhumma innī aʿūdhu bika minal-kufri wal-faqr, wa aʿūdhu bika min ʿadhābil-qabr, lā ilāha illā ant.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मेरे जिस्म को आफ़ियत दे। ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को सलामत रख। ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को सलामत रख। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ कुफ़्र और मोहताजी से, और तेरी पनाह माँगता हूँ क़ब्र के अज़ाब से। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। (अरबी में तीन बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 3।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/324।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma ʿāfinī fī badanī, Allāhumma ʿāfinī fī samʿī, Allāhumma…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मेरे जिस्म को आफ़ियत दे”। स्रोत: Abu Dawud 4/324, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मेरे जिस्म को आफ़ियत दे। ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को सलामत रख। ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को सलामत रख। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ कुफ़्र और मोहताजी से, और तेरी पनाह माँगता हूँ क़ब्र के अज़ाब से। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। (अरबी में तीन बार पढ़ें।).

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma ʿāfinī fī badanī, Allāhumma ʿāfinī fī samʿī, Allāhumma ʿāfinī fī baṣarī, lā ilāha illā ant. Allāhumma innī aʿūdhu bika minal-kufri wal-faqr, wa aʿūdhu bika min ʿadhābil-qabr, lā ilāha illā ant.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/324। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 3 बार।

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