सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 16)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā wa aṣbaḥal-mulku lillāhi Rabbi ‘l-a`lāmīn”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ वह सारी बादशाहत भी जो अल्लाह की है, जो सारे जहानों का रब…”। स्रोत: Abu Dawud 4/322, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

أَصْبَحْنا وَأَصْبَحْ المُلكُ للهِ رَبِّ العالَمين، اللّهُمَّ إِنِّي أسْأَلُكَ خَيْرَ هذا اليَوْم،فَتْحَهُ، وَنَصْرَهُ، وَنورَهُ وَبَرَكَتَهُ، وَهُداهُ،وَأَعوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ ما فيهِ وَشَرِّ ما بَعْدَه
وإذا أمسى قال:أَمْسَيْنا وَأَمْسى المُلكُ للهِ رَبِّ العالَمين،اللّهُمَّ إِنِّي أسْأَلُكَ خَيْرَ هذهِ اللَّيْلَة،فَتْحَها، وَنَصْرَها، وَنورَها وَبَرَكَتَها، وَهُداها،وَأَعوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ ما فيهاِ وَشَرِّ ما بَعْدَها

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Aṣbaḥnā wa aṣbaḥal-mulku lillāhi Rabbi ‘l-a`lāmīn, Allāhumma innī as'aluka khayra hādha ‘l-yawm: Fat’ḥahu wa naṣrahu wa nūrahu, wa barakatahu, wa hudāh, wa a`ūdhu bika min sharri mā fīhi wa sharri mā ba`dah.

हिंदी अर्थ

हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ वह सारी बादशाहत भी जो अल्लाह की है, जो सारे जहानों का रब है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ, इसकी फ़तह, इसकी मदद, इसका नूर, इसकी बरकत और इसकी हिदायत। और तेरी पनाह माँगता हूँ उस बुराई से जो इसमें है, और उस बुराई से जो इसके बाद आए।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/322।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā wa aṣbaḥal-mulku lillāhi Rabbi ‘l-a`lāmīn”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ वह सारी बादशाहत भी जो अल्लाह की है, जो सारे जहानों का रब…”। स्रोत: Abu Dawud 4/322, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

हमने नए दिन में सुबह की और उसके साथ वह सारी बादशाहत भी जो अल्लाह की है, जो सारे जहानों का रब है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ, इसकी फ़तह, इसकी मदद, इसका नूर, इसकी बरकत और इसकी हिदायत। और तेरी पनाह माँगता हूँ उस बुराई से जो इसमें है, और उस बुराई से जो इसके बाद आए।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Aṣbaḥnā wa aṣbaḥal-mulku lillāhi Rabbi ‘l-a`lāmīn, Fat’ḥahu wa naṣrahu wa nūrahu, wa barakatahu, wa hudāh, wa a`ūdhu bika min sharri mā fīhi wa sharri mā ba`dah.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/322। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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