रात में करवट बदलते समय की दुआ

रात में करवट बदलते समय की दुआ। सोने, जागने और ख़्वाब की दुआएँ।

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। यह हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

रात में करवट बदलते समय की दुआ: अरबी पाठ

لا إِلهَ إِلاّ اللهُالواحِدُ القَهّاررَبُّ السَّمواتِ وَالأرْضِ وَما بَيْنَهماالعَزيزُ الغَفّار

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Lā ilāha illallāh al-Wāḥidul-Qahhār, Rabbus-samāwāti wa ‘l-arḍi wa mā baynahuma al-`Azīzul-Ghaffār.

हिंदी अर्थ

अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह एक है, सब पर ग़ालिब, आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ का रब, बहुत ग़ालिब, बहुत बख़्शने वाला।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “रात में करवट बदलते समय की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। यह हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह एक है, सब पर ग़ालिब, आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ का रब, बहुत ग़ालिब, बहुत बख़्शने वाला।

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh al-Wāḥidul-Qahhār, Rabbus-samāwāti wa ‘l-arḍi wa mā baynahuma al-`Azīzul-Ghaffār.

“रात में करवट बदलते समय की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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