सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 15)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Yā Ḥayyu yā Qayyūm, bi-raḥmatika astaghīth, aṣliḥ lī shaʾnī…”, और इसका अर्थ है: “ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको क़ायम रखने वाले! मैं तेरी रहमत के वास्ते तुझसे फ़रियाद करता हूँ कि मेरे सारे…”। स्रोत: Al-Hakim 1/545, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

يا حَيُّ يا قَيّومُ بِرَحْمَتِكِ أَسْتَغيث،أَصْلِحْ لي شَأْني كُلَّه،وَلا تَكِلني إِلى نَفْسي طَرْفَةَ عَين

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Yā Ḥayyu yā Qayyūm, bi-raḥmatika astaghīth, aṣliḥ lī shaʾnī kullahū, wa lā takilnī ilā nafsī ṭarfata ʿayn.

हिंदी अर्थ

ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको क़ायम रखने वाले! मैं तेरी रहमत के वास्ते तुझसे फ़रियाद करता हूँ कि मेरे सारे मामले दुरुस्त कर दे। मुझे पलक झपकने (यानी एक लम्हे) के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Hakim 1/545।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Yā Ḥayyu yā Qayyūm, bi-raḥmatika astaghīth, aṣliḥ lī shaʾnī…”, और इसका अर्थ है: “ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको क़ायम रखने वाले! मैं तेरी रहमत के वास्ते तुझसे फ़रियाद करता हूँ कि मेरे सारे…”। स्रोत: Al-Hakim 1/545, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको क़ायम रखने वाले! मैं तेरी रहमत के वास्ते तुझसे फ़रियाद करता हूँ कि मेरे सारे मामले दुरुस्त कर दे। मुझे पलक झपकने (यानी एक लम्हे) के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Yā Ḥayyu yā Qayyūm, bi-raḥmatika astaghīth, aṣliḥ lī shaʾnī kullahū, wa lā takilnī ilā nafsī ṭarfata ʿayn.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Hakim 1/545। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 1 बार।

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