सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 18)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “SubḥānAllāhi wa bi-ḥamdih”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह पाक है और उसी की तारीफ़ है”। स्रोत: Al-Bukhari 4/2071, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

سُبْحانَ اللهِ وَبِحَمْدِهِ. (مائة مرة)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

SubḥānAllāhi wa bi-ḥamdih.

हिंदी अर्थ

अल्लाह पाक है और उसी की तारीफ़ है। (अरबी में सौ बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 100।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 4/2071।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “SubḥānAllāhi wa bi-ḥamdih”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह पाक है और उसी की तारीफ़ है”। स्रोत: Al-Bukhari 4/2071, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह पाक है और उसी की तारीफ़ है। (अरबी में सौ बार पढ़ें।).

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): SubḥānAllāhi wa bi-ḥamdih.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 4/2071। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 100 बार।

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