सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 14)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Raḍītu billāhi Rabbā, wa bil-Islāmi dīnā, wa bi-Muḥammadin ﷺ…”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के रब होने पर राज़ी हूँ”। स्रोत: Ahmad 4/337, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

رَضيتُ بِاللهِ رَبَّاًوَبِالإسْلامِ ديناًوَبِمُحَمَّدٍ نَبِيّاً.(ثلاث مرات)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Raḍītu billāhi Rabbā, wa bil-Islāmi dīnā, wa bi-Muḥammadin ﷺ nabiyyā.

हिंदी अर्थ

मैं अल्लाह के रब होने पर राज़ी हूँ, इस्लाम के दीन होने पर, और मुहम्मद ﷺ के नबी होने पर। (अरबी में तीन बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 3।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ahmad 4/337।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Raḍītu billāhi Rabbā, wa bil-Islāmi dīnā, wa bi-Muḥammadin ﷺ…”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के रब होने पर राज़ी हूँ”। स्रोत: Ahmad 4/337, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं अल्लाह के रब होने पर राज़ी हूँ, इस्लाम के दीन होने पर, और मुहम्मद ﷺ के नबी होने पर। (अरबी में तीन बार पढ़ें।).

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Raḍītu billāhi Rabbā, wa bil-Islāmi dīnā, wa bi-Muḥammadin ﷺ nabiyyā.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Ahmad 4/337। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 3 बार।

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