सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 19)
सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Ahmad 8/704, 16/293, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ʿalā kulli shayʾin qadīr.
हिंदी अर्थ
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। (अरबी में दस बार पढ़ें, या सुस्ती दूर करने के लिए एक बार।)
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 10।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ahmad 8/704, 16/293।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa…”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: Ahmad 8/704, 16/293, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। (अरबी में दस बार पढ़ें, या सुस्ती दूर करने के लिए एक बार।).
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illa-llāhu waḥdahū lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ʿalā kulli shayʾin qadīr.
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?
Ahmad 8/704, 16/293। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?
स्रोत के अनुसार 10 बार।
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