सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 10)
सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Ḥasbiyallāhu lā ilāha illā Hū, ʿalayhi tawakkaltu, wa Huwa…”, और इसका अर्थ है: “मुझे अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Abu Dawud 4/321, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Ḥasbiyallāhu lā ilāha illā Hū, ʿalayhi tawakkaltu, wa Huwa Rabbul-ʿarshil-ʿaẓīm.
हिंदी अर्थ
मुझे अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया, वह अर्श-ए-अज़ीम का रब है। (अरबी में सात बार पढ़ें।)
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 7।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/321।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Ḥasbiyallāhu lā ilāha illā Hū, ʿalayhi tawakkaltu, wa Huwa…”, और इसका अर्थ है: “मुझे अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Abu Dawud 4/321, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?
मुझे अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया, वह अर्श-ए-अज़ीम का रब है। (अरबी में सात बार पढ़ें।).
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Ḥasbiyallāhu lā ilāha illā Hū, ʿalayhi tawakkaltu, wa Huwa Rabbul-ʿarshil-ʿaẓīm.
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 4/321। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?
स्रोत के अनुसार 7 बार।
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