सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 23)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Astaghfirullāha wa atūbu ilayh”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ। (दिन में अरबी में सौ बार पढ़ें।)”। स्रोत: Muslim 4/2075, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ(مِائَةَ مَرَّةٍ فِي الْيَوْمِ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Astaghfirullāha wa atūbu ilayh.

हिंदी अर्थ

मैं अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ। (दिन में अरबी में सौ बार पढ़ें।)

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 100।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2075।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Astaghfirullāha wa atūbu ilayh”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ। (दिन में अरबी में सौ बार पढ़ें।)”। स्रोत: Muslim 4/2075, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं अल्लाह से बख़्शिश माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ। (दिन में अरबी में सौ बार पढ़ें।).

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Astaghfirullāha wa atūbu ilayh.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 4/2075। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?

स्रोत के अनुसार 100 बार।

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