सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 17)
सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā ʿalā fiṭratil-Islām, wa ʿalā kalimatil-ikhlāṣ, wa ʿalā dīni…”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में फ़ितरत-ए-इस्लाम पर सुबह की”। स्रोत: Ahmad 3/406-7, 5/123, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Aṣbaḥnā ʿalā fiṭratil-Islām, wa ʿalā kalimatil-ikhlāṣ, wa ʿalā dīni nabiyyinā Muḥammadin ﷺ, wa ʿalā millati abīnā Ibrāhīma, ḥanīfan musliman, wa mā kāna minal-mushrikīn.
हिंदी अर्थ
हमने नए दिन में फ़ितरत-ए-इस्लाम पर सुबह की, इख़्लास के कलिमे पर, हमारे नबी मुहम्मद ﷺ के दीन पर, और हमारे बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। वह यकसू (अल्लाह की इबादत करने वाले) और मुस्लिम थे। और वह उनमें से न थे जो अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ahmad 3/406-7, 5/123।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Aṣbaḥnā ʿalā fiṭratil-Islām, wa ʿalā kalimatil-ikhlāṣ, wa ʿalā dīni…”, और इसका अर्थ है: “हमने नए दिन में फ़ितरत-ए-इस्लाम पर सुबह की”। स्रोत: Ahmad 3/406-7, 5/123, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?
हमने नए दिन में फ़ितरत-ए-इस्लाम पर सुबह की, इख़्लास के कलिमे पर, हमारे नबी मुहम्मद ﷺ के दीन पर, और हमारे बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। वह यकसू (अल्लाह की इबादत करने वाले) और मुस्लिम थे। और वह उनमें से न थे जो अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Aṣbaḥnā ʿalā fiṭratil-Islām, wa ʿalā kalimatil-ikhlāṣ, wa ʿalā dīni nabiyyinā Muḥammadin ﷺ, wa ʿalā millati abīnā Ibrāhīma, ḥanīfan musliman, wa mā kāna minal-mushrikīn.
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?
Ahmad 3/406-7, 5/123। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?
स्रोत के अनुसार 1 बार।
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