सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 8)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma mā aṣbaha bī min ni`matin”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! जो नेमत मुझे या तेरी मख़लूक़ में से किसी को मिली है”। स्रोत: Abu Dawud 4/318, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ ما أَصْبََحَ بي مِنْ نِعْمَةٍأَو بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِك،فَمِنْكَ وَحْدَكَ لا شريكَ لَك،فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْر

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma mā aṣbaha bī min ni`matin aw bi aḥadin min khalqik, fa minka waḥdaka lā sharīka lak, falaka ‘l-ḥamdu wa lakash-shukr.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! जो नेमत मुझे या तेरी मख़लूक़ में से किसी को मिली है वह तुझ अकेले ही की ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं। तेरे ही लिए हर प्रशंसा है और तेरा ही शुक्र है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/318।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma mā aṣbaha bī min ni`matin”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! जो नेमत मुझे या तेरी मख़लूक़ में से किसी को मिली है”। स्रोत: Abu Dawud 4/318, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! जो नेमत मुझे या तेरी मख़लूक़ में से किसी को मिली है वह तुझ अकेले ही की ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं। तेरे ही लिए हर प्रशंसा है और तेरा ही शुक्र है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma mā aṣbaha bī min ni`matin aw bi aḥadin min khalqik, fa minka waḥdaka lā sharīka lak, falaka ‘l-ḥamdu wa lakash-shukr.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/318। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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