सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 11)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ”। स्रोत: Ibn Majah 2/332, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ إِنِّي أسْأَلُكَ العَفْوَ وَالعافِيةَفي الدُّنْيا وَالآخِرَة،اللّهُمَّ إِنِّي أسْأَلُكَ العَفْوَ وَالعافِيةَفي ديني وَدُنْيايَ وَأهْلي وَمالي،اللّهُمَّ اسْتُرْ عوْراتيوَآمِنْ رَوْعاتي،اللّهُمَّ احْفَظْني مِن بَينِ يَدَيَّ وَمِن خَلْفيوَعَن يَميني وَعَن شِمالي،وَمِن فَوْقي،وَأَعوذُ بِعَظَمَتِكَ أَن أُغْتالَ مِن تَحْتي

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah fid-dunyā wal-ākhirah, Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah fī dīnī wa dunyāya, wa ahlī, wa mālī, Allāhummastur `awrātī, wa āmin raw`ātī, Allāhummaḥfaẓnī min bayni yadayya, wa min khalfī, wa `an yamīnī, wa `an shimālī, wa min fawqī, wa a`ūdhu bi`aẓamatika an 'ughtāla min taḥtī.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने घर वालों और अपने माल में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मेरे ऐब छुपा दे और मुझे घबराहट से अमन दे। ऐ अल्लाह! मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा मेरे आगे से और पीछे से, मेरे बाएँ से, मेरे दाएँ से और मेरे ऊपर से। मैं तेरी अज़मत के वास्ते पनाह माँगता हूँ इससे कि मुझे नीचे से हलाक किया जाए।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ibn Majah 2/332।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ”। स्रोत: Ibn Majah 2/332, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने घर वालों और अपने माल में माफ़ी और आफ़ियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मेरे ऐब छुपा दे और मुझे घबराहट से अमन दे। ऐ अल्लाह! मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा मेरे आगे से और पीछे से, मेरे बाएँ से, मेरे दाएँ से और मेरे ऊपर से। मैं तेरी अज़मत के वास्ते पनाह माँगता हूँ इससे कि मुझे नीचे से हलाक किया जाए।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah fid-dunyā wal-ākhirah, Allāhumma innī as'aluka 'l-`afwa wal-`āfiyah fī dīnī wa dunyāya, wa ahlī, wa mālī, Allāhummastur `awrātī, wa āmin raw`ātī, Allāhummaḥfaẓnī min bayni yadayya, wa min khalfī, wa `an yamīnī, wa `an shimālī, wa min fawqī, wa a`ūdhu bi`aẓamatika an 'ughtāla min taḥtī.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Ibn Majah 2/332। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

और दुआएँ: सुबह और शाम · सभी दुआएँ