सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 6)
सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma anta Rabbī lā ilāha illā anta, khalaqtanī wa…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Al-Bukhari 7/150, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma anta Rabbī lā ilāha illā anta, khalaqtanī wa anā ʿabduk, wa anā ʿalā ʿahdika wa waʿdika ma-staṭaʿt. Aʿūdhu bika min sharri mā ṣanaʿt, abūʾu laka bi-niʿmatika ʿalayya, wa abūʾu bi-dhanbī, faghfir lī fa-innahū lā yaghfirudh-dhunūba illā ant.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त भर तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैं तेरी पनाह माँगता हूँ उस बुराई से जो मैंने की। मैं अपने ऊपर तेरी नेमतों का इक़रार करता हूँ, और अपने गुनाहों का इक़रार करता हूँ। मुझे बख़्श दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाह नहीं बख़्शता।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दी गई दोहराने की संख्या: 1।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/150।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma anta Rabbī lā ilāha illā anta, khalaqtanī wa…”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Al-Bukhari 7/150, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त भर तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैं तेरी पनाह माँगता हूँ उस बुराई से जो मैंने की। मैं अपने ऊपर तेरी नेमतों का इक़रार करता हूँ, और अपने गुनाहों का इक़रार करता हूँ। मुझे बख़्श दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाह नहीं बख़्शता।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma anta Rabbī lā ilāha illā anta, khalaqtanī wa anā ʿabduk, wa anā ʿalā ʿahdika wa waʿdika ma-staṭaʿt. Aʿūdhu bika min sharri mā ṣanaʿt, abūʾu laka bi-niʿmatika ʿalayya, wa abūʾu bi-dhanbī, faghfir lī fa-innahū lā yaghfirudh-dhunūba illā ant.
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari 7/150। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कितनी बार पढ़ी जाए?
स्रोत के अनुसार 1 बार।
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