सुबह और शाम के अज़कार (25 में से 12)

सुबह और शाम के अज़कार। सुबह-शाम के अज़कार।

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma `ālima ‘l-ghaybi wash-shahādah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! ग़ैब और ज़ाहिर के जानने वाले”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सुबह और शाम के अज़कार: अरबी पाठ

اللّهُمَّ عالِمَ الغَيْبِ وَالشّهادَةِفاطِرَ السّماواتِ وَالأرْضِرَبَّ كلِّ شَيءٍ وَمَليكَه،أَشْهَدُ أَنْ لا إِلهَ إِلاّ أَنْت،أَعوذُ بِكَ مِن شَرِّ نَفْسيوَمِن شَرِّ الشَّيْطانِ وَشِرْكِه،وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلى نَفْسي سوءاًأَوْ أَجُرَّهُ إِلى مُسْلِم

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma `ālima ‘l-ghaybi wash-shahādah fātir as-samāwāti wa ‘l'arḍ, Rabba kulli shay'in wa malīkah, ash-hadu an lā ilāha illā ant, a`ūdhu bika min sharri nafsī, wa min sharrish-shayṭāni wa shirkih, wa an aqtarifa `alā nafsī sū'an, aw ajurrahu ilā Muslim.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! ग़ैब और ज़ाहिर के जानने वाले, आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और मालिक, मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं अपने नफ़्स की बुराई से, शैतान की बुराई और उसके शिर्क से तेरी पनाह माँगता हूँ। (और तेरी पनाह माँगता हूँ) इससे कि मैं अपने नफ़्स पर कोई बुराई लाऊँ या किसी मुसलमान को नुक़सान पहुँचाऊँ।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सुबह और शाम के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सुबह और शाम के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 25 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma `ālima ‘l-ghaybi wash-shahādah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! ग़ैब और ज़ाहिर के जानने वाले”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/142, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! ग़ैब और ज़ाहिर के जानने वाले, आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और मालिक, मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं अपने नफ़्स की बुराई से, शैतान की बुराई और उसके शिर्क से तेरी पनाह माँगता हूँ। (और तेरी पनाह माँगता हूँ) इससे कि मैं अपने नफ़्स पर कोई बुराई लाऊँ या किसी मुसलमान को नुक़सान पहुँचाऊँ।

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma `ālima ‘l-ghaybi wash-shahādah fātir as-samāwāti wa ‘l'arḍ, Rabba kulli shay'in wa malīkah, ash-hadu an lā ilāha illā ant, a`ūdhu bika min sharri nafsī, wa min sharrish-shayṭāni wa shirkih, wa an aqtarifa `alā nafsī sū'an, aw ajurrahu ilā Muslim.

“सुबह और शाम के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 3/142। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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