सलाम आम करने की फ़ज़ीलत (3 में से 3)

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) ने कहा: एक शख़्स ने नबी ﷺ से पूछा: “इस्लाम का सबसे बेहतर अमल कौन-सा है?” आपने फ़रमाया…”। स्रोत: Muslim 1/65, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا: أنَّ رَجُلاً سَأَلَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أيُّ الْإِسْلاَمِ خَيْرٌ قَالَ: (تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

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हिंदी अर्थ

अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) ने कहा: एक शख़्स ने नबी ﷺ से पूछा: “इस्लाम का सबसे बेहतर अमल कौन-सा है?” आपने फ़रमाया: “खाना खिलाना और सलाम करना, उन्हें भी जिन्हें तुम जानते हो और उन्हें भी जिन्हें नहीं जानते।”

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 1/65।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) ने कहा: एक शख़्स ने नबी ﷺ से पूछा: “इस्लाम का सबसे बेहतर अमल कौन-सा है?” आपने फ़रमाया…”। स्रोत: Muslim 1/65, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?

अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) ने कहा: एक शख़्स ने नबी ﷺ से पूछा: “इस्लाम का सबसे बेहतर अमल कौन-सा है?” आपने फ़रमाया: “खाना खिलाना और सलाम करना, उन्हें भी जिन्हें तुम जानते हो और उन्हें भी जिन्हें नहीं जानते।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): --

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 1/65। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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