छींक आने पर की दुआ

छींक आने पर की दुआ। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“छींक आने पर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“छींक आने पर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Alḥamdulillāh”, और इसका अर्थ है: “सारी तारीफ़ और शुक्र अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Al-Bukhari 7/125, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

छींक आने पर की दुआ: अरबी पाठ

إِذَا عَطَسَ أَحَدُكُم فَلْيَقُلِ (الْحَمْدُ لِلَّهِ)،وَلْيَقُلْ لَهُ أَخُوهُ أَوْ صَاحِبُهُ: (يَرْحَمُكَ اللَّهُ)،فَإِذَا قَالَ لَهُ: (يَرحَمُكَ اللَّهُ)، فَلْيَقُلْ: (يَهْدِيكُمُ اللَّهُ وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

When you sneeze , then say : Alḥamdulillāh Your companion should say : Yarḥamukallāh When someone says Yarḥamukallāh to you then you should say: Yahdīkumu ‘llāhu wa yuṣliḥu bālakum.

हिंदी अर्थ

जब तुम्हें छींक आए तो कहो: सारी तारीफ़ और शुक्र अल्लाह के लिए है। तुम्हारा साथी कहे: अल्लाह तुम पर रहम करे। जब कोई तुमसे «यरहमुकल्लाह» कहे तो तुम कहो: अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारे मामले दुरुस्त कर दे।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “छींक आने पर की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/125।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“छींक आने पर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“छींक आने पर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Alḥamdulillāh”, और इसका अर्थ है: “सारी तारीफ़ और शुक्र अल्लाह के लिए है”। स्रोत: Al-Bukhari 7/125, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

“छींक आने पर की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

सारी तारीफ़ और शुक्र अल्लाह के लिए है। अल्लाह तुम पर रहम करे। अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारे मामले दुरुस्त कर दे।

“छींक आने पर की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Alḥamdulillāh Yarḥamukallāh Yahdīkumu ‘llāhu wa yuṣliḥu bālakum.

“छींक आने पर की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 7/125। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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