किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ

किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Alhamdu lillāhi ‘l-ladhī `āfānī mimmab-talāka bihi”, और इसका अर्थ है: “सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे उससे बचाया जिसमें उसने तुम्हें मुब्तला किया”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/493,4, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ: अरबी पाठ

الْحَمْدُ للهِ الّذي عافاني مِمّا ابْتَلاكَ بِهِ،وَفَضَّلَني عَلى كَثيرٍ مِمَّنْ خَلَقَ تَفْضيلا

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Alhamdu lillāhi ‘l-ladhī `āfānī mimmab-talāka bihi wa faḍḍalanī `alā kathīrin mimman khalaqa tafḍīlā.

हिंदी अर्थ

सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे उससे बचाया जिसमें उसने तुम्हें मुब्तला किया, और मुझे अपनी बहुत-सी मख़लूक़ पर बड़ी फ़ज़ीलत दी।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 5/493,4।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Alhamdu lillāhi ‘l-ladhī `āfānī mimmab-talāka bihi”, और इसका अर्थ है: “सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे उससे बचाया जिसमें उसने तुम्हें मुब्तला किया”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/493,4, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे उससे बचाया जिसमें उसने तुम्हें मुब्तला किया, और मुझे अपनी बहुत-सी मख़लूक़ पर बड़ी फ़ज़ीलत दी।

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Alhamdu lillāhi ‘l-ladhī `āfānī mimmab-talāka bihi wa faḍḍalanī `alā kathīrin mimman khalaqa tafḍīlā.

“किसी को आज़माइश में देखकर की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 5/493,4। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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